केंद्र सरकार ने प्याज की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने और उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए रबी विपणन सीजन 2026-27 के दौरान इस वर्ष मूल्य स्थिरीकरण निधि के तहत 2 लाख टन प्याज की खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी को नाफेड और एनसीसीएफ संयुक्त रूप से संभालेंगे, जहाँ दोनों एजेंसियों को 1-1 लाख टन प्याज खरीदने का लक्ष्य दिया गया है।
सरकार का मुख्य उद्देश्य मौजूदा रबी फसल से समय पर स्टॉक जमा करना है, ताकि भविष्य में आपूर्ति संकट से बचा जा सके। प्याज के इस बफर स्टॉक का रणनीतिक उपयोग मुख्य रूप से सितंबर से नवंबर के बीच किया जाता है। यह वह समय होता है जब मंडियों में प्याज की आवक कम हो जाती है और बाजार में कीमतें तेजी से बढ़ने लगती हैं। समय रहते खरीद शुरू करने के निर्देश इसलिए भी दिए गए हैं ताकि पिछले सीजन जैसी देरी न हो, जब खरीद सामान्य समय से दो महीने की देरी से जुलाई में शुरू हुई थी।
वर्ष 2024-25 में रिकॉर्ड 4.7 लाख टन प्याज की खरीद की गई थी, जबकि अगले वर्ष बाजार में आपूर्ति स्थिर रहने के कारण यह आंकड़ा घटकर 3 लाख टन रह गया था। इस वर्ष का 2 लाख टन का लक्ष्य बाजार की वर्तमान स्थितियों और उत्पादन के अनुमानों के आधार पर तय किया गया है, ताकि सरकारी हस्तक्षेप और बाजार के प्राकृतिक संतुलन के बीच एक सामंजस्य बना रहे।
भारत में हर साल लगभग 280 से 300 लाख टन प्याज का उत्पादन होता है। इसमें रबी की फसल की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि कुल उत्पादन का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा इसी सीजन से आता है। ऐसे में रबी सीजन के दौरान बफर स्टॉक का निर्माण करना न केवल कीमतों को स्थिर रखने के लिए अनिवार्य है, बल्कि यह बाजार में मांग और आपूर्ति के बीच एक सुरक्षा कवच की तरह भी काम करता है।
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