केंद्र सरकार ने कहा है कि आगामी खरीफ सीजन के लिए देश में बीजों की पर्याप्त मात्रा उपलब्धता है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर मंडराते खतरों के बीच सरकार का यह बयान कृषि क्षेत्र के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। कृषि विभाग की अतिरिक्त सचिव मनिंदर कौर द्विवेदी ने स्पष्ट किया है कि भारत की बीज प्रणाली पूरी तरह आत्मनिर्भर है और किसी भी वैश्विक संकट का सामना करने के लिए तैयार है।
भारत की इस मज़बूत व्यवस्था को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, सार्वजनिक क्षेत्र और निजी क्षेत्र का साझा सहयोग प्राप्त है। किसी भी संभावित वैश्विक व्यवधान से निपटने के लिए प्रमाणित, आधारभूत और संकर बीजों की एक सुदृढ़ आपूर्ति श्रृंखला तैयार रखी गई है। इससे सुनिश्चित होगा कि बुवाई के हर चरण में किसानों को प्रजनन सामग्री की कोई कमी महसूस न हो और कृषि उत्पादकता बनी रहे।
सरकार केवल बीजों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि सभी प्रमुख कृषि उत्पादों के थोक मूल्यों पर भी पैनी नजर रख रही है। राहत की बात यह है कि टमाटर, प्याज और आलू जैसी बुनियादी फसलों की कीमतें वर्तमान में स्थिर हैं और उनमें सुधार के सकारात्मक रुझान देखे जा रहे हैं। थोक बाज़ार में कीमतों का यह संतुलित स्तर उपभोक्ताओं और किसानों, दोनों के लिए एक सुखद संकेत है।
खरीफ सीजन 2026 के लिए उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि देश के पास आवश्यकता से अधिक बीजों का भंडार है। जहाँ कुल 166.46 लाख क्विंटल बीजों की ज़रूरत है, वहीं वर्तमान में 185.74 लाख क्विंटल बीज उपलब्ध हैं। इस प्रकार, सरकार के पास 19.29 लाख क्विंटल बीज का अधिशेष मौजूद है, जो किसी भी आपात स्थिति के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करेगा।
बीजों के साथ-साथ आगामी रबी सीजन और उर्वरकों की उपलब्धता का भी अग्रिम आकलन कर लिया गया है। पिछले कुछ वर्षों में उर्वरकों का पर्याप्त बफर स्टॉक बनाने के लिए उठाए गए सरकारी कदमों से समय पर खाद की आपूर्ति सुनिश्चित होगी। सरकार का यह व्यापक प्रबंधन न केवल किसानों की लागत को नियंत्रित रखेगा, बल्कि देश की दीर्घकालिक खाद्य सुरक्षा को भी मज़बूती प्रदान करेगा।
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