देश भर में इस साल ग्रीष्मकालीन यानी जायद फसलों की बुवाई ने जबरदस्त रफ्तार पकड़ ली है। कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 3 अप्रैल तक कुल बुवाई का रकबा 58 लाख हेक्टेयर के आंकड़े को पार कर चुका है। पिछले साल की तुलना में यह एक बड़ी बढ़त है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए बेहद सकारात्मक संकेत है। इस सीजन में भी धान बुवाई के मामले में सबसे आगे बना हुआ है।
अब तक लगभग 30 लाख हेक्टेयर से अधिक जमीन पर धान की रोपाई हो चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अनुकूल मौसम और समय पर खेतों की तैयारी ने किसानों को इस बार जल्दी शुरुआत करने में मदद की है। दलहन फसलों के प्रति भी किसानों का रुझान इस साल काफी बढ़ा हुआ नजर आ रहा है। पिछले साल जहाँ दलहन का रकबा 7.02 लाख हेक्टेयर था, वह इस बार रकबा बढ़कर 8 लाख हेक्टेयर तक पहुँच गया है। मोटे अनाज की बुवाई भी तेजी से आगे बढ़ रही है।
अब तक लगभग 11 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में मिलेट्स और मोटे अनाजों की बुवाई हो चुकी है। इसके साथ ही तिलहन का रकबा भी 7.74 लाख हेक्टेयर से अधिक हो गया है, जो तेल आयात पर निर्भरता कम करने के लक्ष्य को मजबूती देता है। कृषि वैज्ञानिकों का विश्लेषण है कि बेहतर सरकारी नीतियों और खाद-बीज की समय पर उपलब्धता ने इस विस्तार में बड़ी भूमिका निभाई है।
दलहन और मिलेट्स के बढ़ते रकबे से देश की पोषण सुरक्षा मजबूत होगी और भविष्य में इनके निर्यात की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। फिलहाल बुवाई का काम जोर-शोर से जारी है। यदि आने वाले हफ्तों में मौसम इसी तरह सहयोग करता रहा, तो इस सीजन में फसलों का उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर रहने की उम्मीद है। यह न केवल बाजार में कीमतों को स्थिर रखेगा, बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति में भी बड़ा सुधार लाएगा।
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