• Home
  • पशुपालन
  • कृषि जागृति
  • कृषि समाचार
  • कृषि तकनीक
  • कृषि उपकरण
  • सरकारी योजनाएं
  • कृषि जागृति संदेश
  • गैलवे कृषम फार्मिंग

कृषि जागृति-Krishi Jagriti

कृषि जागृति चलो गांव की ओर

Home » पश्चिम एशिया तनाव से भारतीय आम निर्यात पर छाया संकट

पश्चिम एशिया तनाव से भारतीय आम निर्यात पर छाया संकट

15/04/2026 by Anil Kumar Prasad

पश्चिम एशिया तनाव से भारतीय आम निर्यात पर छाया संकट

भारत के प्रीमियम आमों, विशेषकर अल्फांसो (हापुस) और केसर के निर्यात सीजन पर पश्चिम एशिया में जारी तनाव का प्रतिकूल प्रभाव पड़ने लगा है। समुद्री मार्गों में पैदा हुई बाधाओं और लॉजिस्टिक्स लागत में अचानक आई भारी तेजी ने निर्यातकों के मुनाफे और निर्यात खेपों की मात्रा दोनों को संकट में डाल दिया है। खाड़ी देशों को जाने वाले आमों के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक मुख्य रास्ता है, जहाँ वर्तमान भू-राजनीतिक अस्थिरता ने पूरी आपूर्ति श्रृंखला को अस्त-व्यस्त कर दिया है।

निर्यातकों के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय रेफ्रिजरेटेड कंटेनरों की भारी किल्लत और बढ़ता हुआ माल भाड़ा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, कंटेनर की लागत में लगभग 4,000 प्रति कंटेनर की बढ़ोतरी हुई है, जो सामान्य दिनों की तुलना में करीब चार गुना अधिक है। इस अप्रत्याशित खर्चे और जहाजों के देरी से पहुँचने के कारण आम जैसे जल्दी खराब होने वाले फलों के सड़ने का जोखिम भी काफी बढ़ गया है।

भारतीय आम निर्यात के कुल बाजार में खाड़ी देशों की हिस्सेदारी लगभग 40 से 45 प्रतिशत तक रहती है। इतने बड़े बाजार में व्यवधान आने से पीक सीजन के दौरान ऑर्डर्स को समय पर पूरा करना एक कठिन चुनौती बन गया है। भारत हालांकि दुनिया के लगभग आधे आमों का उत्पादन करता है, लेकिन मौजूदा संकट यह दर्शाता है कि अंतरराष्ट्रीय घटनाओं के कारण पेरिशेबल उत्पादों का व्यापार कितना संवेदनशील हो सकता है।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लॉजिस्टिक्स और शिपिंग की स्थिति में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो इस साल निर्यात की कुल मात्रा में बड़ी गिरावट देखी जा सकती है। भले ही घरेलू बाजारों में आम की आवक सामान्य बनी हुई है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय शिपमेंट में देरी किसानों और निर्यातकों की आय पर सीधा असर डालेगी। यह स्थिति भविष्य के लिए नए बाजारों की खोज और बेहतर कोल्ड-चेन इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता को भी मजबूती से रेखांकित करती है।

पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव ने भारतीय आम निर्यात, विशेषकर अल्फांसो और केसर जैसी प्रीमियम किस्मों के लिए एक गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। लॉजिस्टिक्स लागत में चार गुना वृद्धि, कंटेनरों की कमी और समुद्री मार्गों में असुरक्षा ने न केवल निर्यातकों के मुनाफे को कम किया है, बल्कि खाड़ी देशों जैसे प्रमुख बाजारों (40 से 45% हिस्सेदारी) तक खेप पहुँचाना भी चुनौतीपूर्ण बना दिया है।

यह स्थिति स्पष्ट करती है कि अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता के प्रति ‘पेरिशेबल’ (जल्द खराब होने वाले) उत्पादों का व्यापार कितना संवेदनशील है, जो भविष्य में निर्यात के लिए नए वैकल्पिक बाजारों की खोज और एक अधिक सुदृढ़ एवं आत्मनिर्भर कोल्ड-चेन बुनियादी ढांचे के निर्माण की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करता है।

यह भी पढ़े: अब किसानों से सीधे फल-सब्जियां खरीदेगी सेना- राजनाथ सिंह

जागरूक रहिए व नुकसान से बचिए और अन्य लोगों के जागरूकता के लिए साझा करें। स्वास्थ्य सामग्री, कृषि लेख, सरकारी योजनाएं, कृषि तकनीक, व्यवसायिक एवं जैविक खेती से संबंधित सटीक जानकारियां प्राप्त करने के लिए जुड़े कृषि जागृति चलो गांव की ओर से या कृषि संबंधित किसी भी समस्या के जैविक समाधान के लिए WhatsApp करें।

Filed Under: कृषि समाचार Tagged With: Alphonso, Export Impact, Kesar Mango, Logistics Crisis, Mango Export

WhatsApp व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ें..!

About Anil Kumar Prasad

मेरा नाम Anil Kumar Prasad है। मैं पिछले 5 वर्षों से कृषि क्षेत्र से जुड़ा हूँ। मैं कृषि जागृति-Krishi Jagriti का संस्थापक हूँ। मेरा उद्देश्य भारतीय किसानों के जीवन सुधार हेतु स्वास्थ्य सामग्री, कृषि लेख, सरकारी योजनाएं, कृषि तकनीक, व्यवसायिक एवं जैविक खेती संबंधित जानकारियों का प्रसारण करना है।

Latest Post

मानसून पर मौसम विभाग की इस चेतावनी ने उड़ाई किसानों की नींद

मानसून पर मौसम विभाग की इस चेतावनी ने उड़ाई किसानों की नींद

पश्चिम एशिया तनाव से भारतीय आम निर्यात पर छाया संकट

पश्चिम एशिया तनाव से भारतीय आम निर्यात पर छाया संकट

अब किसानों से सीधे फल-सब्जियां खरीदेगी सेना- राजनाथ सिंह

अब किसानों से सीधे फल-सब्जियां खरीदेगी सेना- राजनाथ सिंह

उत्तर बिहार के किसानों के लिए जलभराव में भी लहलहाएगी गन्ने की ये 2 खास किस्में

उत्तर बिहार के किसानों के लिए जलभराव में भी लहलहाएगी गन्ने की ये 2 खास किस्में

गन्ने की खेती में 'चौड़ी कतार' तकनीक से निर्मल सिंह कमा रहे बंपर मुनाफा

गन्ने की खेती में ‘चौड़ी कतार’ तकनीक से निर्मल सिंह कमा रहे बंपर मुनाफा

कृषि जागृति-Krishi Jagriti

कृषि जागृति-Krishi Jagriti का मुख्य उद्देश्य किसानों के जीवन सुधार हेतु स्वास्थ्य सामग्री, कृषि लेख, सरकारी योजनाएं, कृषि तकनीक, व्यवसायिक एवं जैविक खेती संबंधित सटीक जानकारी प्रसारित करना है। इसके अलावा यदि आप अपने जैविक उत्पाद या लेख का प्रचार करवाना चाहते हैं तो हमसे WhatsApp पर संपर्क कर सकते हैं।

Follow Us

Leran More

  • About Us
  • Contact Us
  • Disclaimer
  • Privacy Policy
  • Terms And Conditions

Search

Copyright © 2026 कृषि जागृति-Krishi Jagriti All Right Reserved