पंजाब सरकार राज्य की गिरती कपास खेती को फिर से जीवित करने के लिए एक बड़ा और महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। कभी ‘सफेद सोना’ के नाम से मशहूर इस फसल को किसानों के लिए फिर से मुनाफे का सौदा बनाने के लिए सरकार ने देसी और बीटी दोनों प्रकार के कपास बीजों पर 33% सब्सिडी देने की घोषणा की है। कृषि विभाग द्वारा लागू की जा रही यह विशेष योजना 20 अप्रैल से शुरू होकर 31 मई तक प्रभावी रहेगी।
इस योजना के तहत लाभ लेने के लिए सरकार ने कुछ जरूरी सीमाएं भी तय की हैं। प्रत्येक किसान को अधिकतम 5 एकड़ भूमि तक के लिए ही इस सब्सिडी का फायदा मिल सकेगा। इसके अलावा, बीज की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि सब्सिडी केवल पंजाब कृषि विश्वविद्यालय द्वारा अनुमोदित किस्मों पर ही दी जाएगी। इससे किसानों को घटिया बीजों के जोखिम से बचाने में मदद मिलेगी।
पंजाब में कपास की खेती का रकबा पिछले कुछ दशकों में काफी तेजी से घटा है। 1980 के दशक में जहाँ राज्य में करीब 7 लाख हेक्टेयर में कपास की फसल लहलहाती थी, वहीं 2024 तक यह सिमटकर महज 1 लाख हेक्टेयर के करीब रह गई है। हालांकि 2025 में इसमें मामूली सुधार के साथ यह 1.19 लाख हेक्टेयर तक पहुंचा था, जिसे ‘ सरकार इस सीजन में बढ़ाकर 1.26 लाख हेक्टेयर तक ले जाना चाहती है।
कपास के क्षेत्र में आई इस भारी गिरावट के पीछे मुख्य रूप से गुलाबी सुंडी (पिंक बॉलवर्म) और सफेद मक्खी जैसे कीटों का भारी प्रकोप रहा है। इसके साथ ही बाजार में मिलने वाली कमजोर कीमतें और मौसम की अनिश्चितता ने भी किसानों का हौसला तोड़ा है। यही कारण है कि पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति सतबीर सिंह गोसल ने समय पर बीजों की आपूर्ति और बेहतर कृषि तकनीकों के इस्तेमाल पर सबसे अधिक जोर दिया है।
कृषि निदेशक गुरजीत सिंह बराड़ का भी मानना है कि कपास की खेती को फिर से लोकप्रिय बनाना केवल सब्सिडी से संभव नहीं होगा। किसानों को इस फसल की ओर वापस लाने के लिए प्रभावी कीट प्रबंधन, फसल की स्थिर कीमतें और दीर्घकालिक सरकारी नीतियों का समर्थन अनिवार्य है। फिलहाल कई किसान जोखिम कम करने के लिए धान जैसी फसलों को ही अधिक सुरक्षित मान रहे हैं।
कुल मिलाकर, सरकार की यह पहल कपास क्षेत्र को दोबारा खड़ा करने की दिशा में एक सकारात्मक शुरुआत है। हालांकि, इस योजना की जमीनी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि किसान सरकार के इन सुरक्षा उपायों पर कितना भरोसा जताते हैं और आने वाले सीजन में मौसम व बाजार की स्थिति कैसी रहती है। कपास की सफल वापसी पंजाब की कृषि विविधता के लिए बेहद जरूरी मानी जा रही है।
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