देश में 2026-27 रबी विपणन सीजन की शुरुआत गेहूं खरीद के मोर्चे पर काफी कमजोर साबित हुई है। भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल के मध्य तक देश भर में कुल 15.30 लाख टन गेहूं की ही खरीद हो पाई है। खरीद का यह आंकड़ा पिछले साल इसी अवधि में हुई 50.08 लाख टन की खरीद की तुलना में लगभग 69 प्रतिशत कम है।
खरीद के साथ-साथ मंडियों में गेहूं की आवक में भी भारी गिरावट दर्ज की गई है। इस साल अब तक केवल 34.74 लाख टन गेहूं ही मंडियों तक पहुंच सका है। पिछले वर्ष इसी समय तक मंडियों में 92.72 लाख टन गेहूं की बंपर आवक हो चुकी थी। इस भारी गिरावट के पीछे बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि को मुख्य कारण माना जा रहा है।
खराब मौसम के कारण न केवल कटाई की प्रक्रिया बुरी तरह प्रभावित हुई है, बल्कि प्रमुख उत्पादक राज्यों में मंडियों तक अनाज पहुंचने में भी काफी देरी हुई है। हरियाणा खरीद के मामले में सबसे आगे चल रहा है। यहां अब तक 11.23 लाख टन गेहूं की खरीद हो चुकी है। हरियाणा के बाद उत्तराखंड और मध्य प्रदेश का नंबर आता है।
उत्तराखंड में 1.66 लाख टन और मध्य प्रदेश में 1.02 लाख टन खरीद दर्ज की गई है। अन्य राज्यों की स्थिति काफी धीमी है। उत्तर प्रदेश में 96,670 टन और पंजाब में अब तक मात्र 29,925 टन गेहूं ही खरीदा जा सका है। वहीं, राजस्थान की स्थिति सबसे कमजोर है, जहां केवल 8,957 टन की खरीद ही हो पाई है।
सरकार ने इस सीजन के लिए गेहूं खरीद का लक्ष्य 30.3 लाख टन निर्धारित किया है। किसानों के लिए इस बार 2,585 रुपय प्रति क्विंटल का न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी तय किया गया है। प्रमुख उत्पादक राज्यों में 1 अप्रैल से खरीद की आधिकारिक शुरुआत हो चुकी है।
अधिकारियों को पूरी उम्मीद है कि आने वाले हफ्तों में मौसम साफ होने के साथ मंडियों में आवक बढ़ेगी और खरीद की गति में भी तेजी आएगी। फिलहाल, यह शुरुआती सुस्ती साफ संकेत दे रही है कि मौसम की मार ने खरीद चक्र को बुरी तरह प्रभावित किया है और अब आगे की स्थिति मंडियों में आवक के सामान्य होने पर ही निर्भर करेगी।
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