उज्जैन के किसानों पर भारी पड़ी पोर्टल की ये बड़ी गलती, 80 क्विंटल की पात्रता, मैसेज 2 क्विंटल का

उज्जैन से सामने आई एक खबर ने किसानों की बड़ी परेशानी को उजागर किया है, जहां जिस किसान को 80 क्विंटल गेहूं बेचने की पात्रता थी, उसे पोर्टल पर केवल 2.70 क्विंटल बेचने का मैसेज मिला। यह सिर्फ एक किसान की समस्या नहीं है, बल्कि तकनीकी गड़बड़ी के कारण कई किसानों को ऐसी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

जिससे उनकी मेहनत और समय दोनों प्रभावित हो रहे हैं। मंडी व्यवस्था में ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग और रजिस्ट्रेशन सिस्टम किसानों की सुविधा के लिए बनाया गया था, लेकिन जमीनी स्तर पर कई जगह यह उल्टा परेशानी बनता दिख रहा है। जिन किसानों के पास 10 बीघा या उससे ज्यादा जमीन है, उनके स्लॉट बुकिंग नंबर तक नहीं आ रहे हैं, जबकि छोटे किसानों के स्लॉट बन जा रहे हैं।

इससे बड़े किसानों की उपज खेत या गोदाम में ही रुकी रह जाती है और समय पर बिक्री नहीं हो पाती। इस तरह की समस्या का सबसे बड़ा नुकसान यह है कि किसान को सही समय पर अपनी फसल का दाम नहीं मिल पाता। कई बार मजबूरी में किसान कम दाम पर व्यापारियों को फसल बेचने के लिए मजबूर हो जाते हैं।

ऊपर से अगर पोर्टल पर गलत डेटा दिख रहा हो, तो किसान के पास कोई स्पष्ट समाधान भी नहीं होता। तकनीकी गड़बड़ी का एक कारण सैटेलाइट सत्यापन और रिकॉर्ड अपडेट में देरी भी बताया जा रहा है। कई मामलों में किसानों की जमीन का सही डेटा पोर्टल पर अपडेट नहीं है, जिससे उनकी बिक्री पात्रता कम दिख रही है।

ऐसे में जरूरी है कि किसान अपने रिकॉर्ड जैसे खसरा, रजिस्ट्रेशन और बैंक डिटेल्स को समय-समय पर चेक करते रहें और किसी भी गड़बड़ी पर तुरंत संबंधित अधिकारी से संपर्क करें। सरकार और प्रशासन को भी इस दिशा में तेजी से सुधार करने की जरूरत है। पोर्टल सिस्टम को सरल और पारदर्शी बनाना जरूरी है ताकि किसान बिना परेशानी के अपनी फसल बेच सकें। साथ ही स्थानीय स्तर पर हेल्प सेंटर और तकनीकी सहायता उपलब्ध होनी चाहिए, जिससे किसानों को तुरंत समाधान मिल सके।

किसानों के लिए यह भी जरूरी है कि वे अपनी उपज को सुरक्षित रखने के लिए सही भंडारण व्यवस्था रखें, ताकि अगर बिक्री में देरी हो तो फसल खराब न हो। साथ ही समूह में जानकारी साझा करना और आसपास के किसानों से संपर्क बनाए रखना भी फायदेमंद रहता है, क्योंकि कई बार सामूहिक रूप से समस्या उठाने पर जल्दी समाधान मिलता है।

यह स्थिति बताती है कि खेती में सिर्फ मेहनत ही नहीं, बल्कि सही सिस्टम और प्रबंधन भी उतना ही जरूरी है। जब तक तकनीकी व्यवस्था जमीन पर सही तरीके से काम नहीं करेगी, तब तक किसानों को पूरी सुविधा नहीं मिल पाएगी।

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