शिवराज सिंह चौहान ने धार-खरगोन के ‘बीज कांड’ में खोला सिस्टम की खामियों का कच्चा चिट्ठा

किसानों के लिए खेती में सबसे बड़ा भरोसा जिस चीज़ पर होता है, वह है बीज। अगर वही बीज खराब निकल जाए, तो किसान की पूरी मेहनत, समय और पैसा दांव पर लग जाता है। हाल ही में मध्यप्रदेश के धार और खरगोन जिलों से सामने आया बीज धोखाधड़ी का मामला इसी कड़वी सच्चाई को उजागर करता है।

इस मामले में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सख्त रुख अपनाते हुए साफ कहा है कि किसानों की मेहनत के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। एक निजी कंपनी पर केस दर्ज हुआ है और संबंधित बीज की बिक्री पर रोक लगा दी गई है। यह कदम जरूरी जरूर है, लेकिन इससे बड़ा सवाल यह है कि ऐसी नौबत आई ही क्यों?

किसान जब बाजार से बीज खरीदता है, तो वह सिर्फ दाने नहीं खरीद रहा होता, बल्कि अपने पूरे सीजन की उम्मीद खरीद रहा होता है। ऐसे में यदि बीज अमानक या नकली निकलता है, तो नुकसान केवल फसल का नहीं होता, बल्कि कर्ज बढ़ता है, परिवार की आर्थिक स्थिति बिगड़ती है और किसान मानसिक दबाव में आ जाता है।

इस घटना ने यह भी दिखाया है कि निगरानी तंत्र में कहीं न कहीं बड़ी कमी है। अगर बीज की गुणवत्ता की जांच और वितरण पर सख्ती होती, तो शायद हजारों किसान इस स्थिति में नहीं फंसते। कई बार कंपनियां प्रमाणित का टैग लगाकर खराब बीज बाजार में उतार देती हैं और फील्ड स्तर पर इसकी सही जांच नहीं हो पाती।

सरकार ने नकली बीज और कीटनाशकों के खिलाफ देशभर में सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं, जो एक सही दिशा में कदम है। लेकिन केवल कार्रवाई काफी नहीं है। जरूरी है कि एक मजबूत सिस्टम बनाया जाए, जहां हर बीज की गुणवत्ता की पारदर्शी जांच हो, किसानों को सही जानकारी मिले और शिकायत होने पर तुरंत समाधान हो।

किसानों के नजरिए से देखें तो यह मामला केवल धोखाधड़ी नहीं, बल्कि विश्वास का संकट है। जब किसान को यह भरोसा नहीं रहेगा कि बाजार से खरीदा गया बीज सही है, तो उसकी पूरी खेती की योजना अस्थिर हो जाती है। इसलिए सरकार और प्रशासन को सिर्फ दोषियों पर कार्रवाई ही नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए ठोस और दीर्घकालीन व्यवस्था बनानी होगी।

किसानों के लिए खेती पहले ही मौसम, लागत और बाजार की अनिश्चितताओं से घिरी हुई है। ऐसे में अगर बीज जैसी बुनियादी चीज भी भरोसेमंद न रहे, तो स्थिति और मुश्किल हो जाती है। इसलिए यह जरूरी है कि इस तरह के मामलों पर सख्ती के साथ-साथ किसानों का विश्वास मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

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