किसानों के लिए खरीफ सीजन 2026 के लिए एक अहम अपडेट सामने आया है। केंद्र सरकार ने Bt कॉटन बीज की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। इसका मतलब है कि Bollgard II Cotton Seeds अब भी लगभग ₹900 प्रति पैकेट (450 ग्राम) पर ही मिलेंगे, जबकि Bollgard I Cotton Seeds की कीमत 2016 से ₹635 प्रति पैकेट ही बनी हुई है।
सरकार हर साल Bt कॉटन बीज की अधिकतम कीमत तय करती है, ताकि कंपनियां किसानों से ज्यादा पैसा न वसूल सकें। इस बार बीज कंपनियों ने महंगाई का हवाला देकर कीमत बढ़ाने की मांग की थी, लेकिन सरकार ने इसे मंजूरी नहीं दी। इसका सीधा फायदा किसानों को यह है कि बीज की लागत फिलहाल नियंत्रित रहेगी।
लेकिन किसानों के लिए सिर्फ बीज की कीमत ही पूरी कहानी नहीं है। आज की सबसे बड़ी चुनौती है कीट प्रबंधन। पहले Bt कॉटन आने के बाद कीटनाशकों का खर्च कम हो गया था, लेकिन अब Pink Bollworm जैसे कीट इसके प्रति प्रतिरोधक (Resistant) बन चुके हैं। इसके अलावा Whitefly का प्रकोप भी कई क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहा है। इसका मतलब है कि भले बीज की कीमत नहीं बढ़ी, लेकिन कीटनाशकों पर खर्च बढ़ सकता है।
भारत में लगभग 95% कपास की खेती Bt कॉटन से होती है, इसलिए यह फैसला पूरे देश के किसानों को प्रभावित करता है। सरकार का तर्क है कि कीमत नियंत्रण जरूरी है, ताकि छोटे और मध्यम किसान महंगे बीज के बोझ से बच सकें।
किसानों के लिए असली रणनीति क्या होनी चाहिए?
सबसे पहले, केवल Bt बीज पर निर्भर न रहें, बल्कि Integrated Pest Management (IPM) अपनाएं। समय पर फेरोमोन ट्रैप लगाएं, फसल की नियमित निगरानी करें और कीटनाशकों का रोटेशन में उपयोग करें। दूसरा, सही समय पर बुवाई और संतुलित खाद प्रबंधन भी कीट प्रकोप को कम करने में मदद करता है। तीसरा, अगर संभव हो तो रिफ्यूजिया (Non-Bt Cotton) का पालन जरूर करें, ताकि कीटों में रेजिस्टेंस बनने की गति धीमी हो।
कुल मिलाकर, बीज की कीमत स्थिर रहना एक राहत है, लेकिन उत्पादन बढ़ाने और लागत कम रखने के लिए आपको कीट प्रबंधन पर ज्यादा ध्यान देना होगा। और हां आप बताएं-आपके क्षेत्र में पिंक बॉलवर्म या सफेद मक्खी का कितना असर है? और आप अभी कौन सा नियंत्रण तरीका अपना रहे हैं?
यद्यपि सरकार ने कीमतें नहीं बढ़ाई हैं, लेकिन कुछ राज्यों में स्थानीय परिवहन और डीलर मार्जिन के कारण ₹900 से ₹925 के बीच मामूली अंतर दिख सकता है। किसानों को हमेशा पक्का बिल मांगने की सलाह दी जानी चाहिए ताकि नकली बीजों से बचा जा सके।
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