किसान दिन-रात मेहनत करके अपनी फसल तैयार करते हैं और उसे बीमारियों या कीटों से बचाने के लिए अपनी कमाई कीटनाशकों पर खर्च करते हैं। लेकिन सबसे ज्यादा निराशा तब होती है जब बाजार से महंगी दवा लाने के बाद भी फसल पर उसका कोई असर नहीं होता और किसानों की पूरी मेहनत के साथ-साथ पैसा भी बर्बाद हो जाता है।
नकली और अमानक दवाइयों का यह जाल हमारी खेती और हमारी उम्मीदों को दीमक की तरह चाट रहा है। इसी गंभीर समस्या को देखते हुए गोरखपुर जिले से एक बहुत ही जरूरी खबर सामने आई है। लंबे समय से हम किसानों की यह मांग रही है कि इन दवा विक्रेताओं की मनमानी और मिलावट पर सख्त रोक लगे।
प्रशासन ने इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए गोरखपुर की सात तहसीलों में 32 कीटनाशक दुकानों पर अचानक छापेमारी की है। इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य हम किसानों को निर्धारित दर पर सही और गुणवत्तापूर्ण कृषि रसायन उपलब्ध कराना तथा कालाबाजारी पर लगाम लगाना है।
अखबार की इस रिपोर्ट के अनुसार, निरीक्षण के दौरान विभाग को कई दुकानों पर भारी अनियमितताएं और नियमों की अनदेखी मिली है। जांच टीमों ने 12 संदिग्ध दवाओं के नमूने भरे हैं और छह दुकानों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इनमें उरुवा बाजार, रझही चौराहे और करमहा चौराहे स्थित कुछ खाद-बीज भंडार शामिल हैं।
यह वही बाजार हैं जहां से हमारे कई किसान भाई अपनी खेती का जरूरी सामान खरीदते हैं। यह प्रशासनिक कार्रवाई हम सभी किसानों के लिए एक बहुत बड़ा सबक है। एक किसान के तौर पर हमें भी अपनी तरफ से पूरी तरह सतर्क रहना होगा। जब भी आप बाजार से कोई कीटनाशक, फफूंदनाशक या खाद खरीदें, तो दुकानदार से पक्का बिल (जीएसटी बिल) देने की जिद जरूर करें।
बिल पर दवा का नाम और बैच नंबर आवश्यक रूप से लिखवाएं। किसी भी अनजान या बिना लेबल वाली सस्ती दवा के झांसे में न आएं। यदि दुकानदार पक्का बिल देने में आनाकानी करता है या आपको दवा संदिग्ध लगती है, तो बिना डरे अपने क्षेत्र के कृषि रक्षा अधिकारी से उसकी शिकायत करें। जब हम खुद जागरूक होंगे और एकजुट होकर सवाल पूछेंगे, तभी हमारी खेती, हमारी फसल और हमारी मेहनत सुरक्षित रहेगी।
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