ढेंकनाल से सिलीगुड़ी पहुंचा 3 टन प्रीमियम आम, किसानों की आय में जबरदस्त उछाल

ओडिशा में इस साल के आम विपणन सीजन की शुरुआत बेहद उत्साहजनक रही है। बाजार तक शुरुआती पहुंच आसान होने के कारण इस बार किसानों को उनकी फसल के काफी अच्छे दाम मिल रहे हैं। इस सीजन की पहली बड़ी घरेलू खेप के तहत ढेंकनाल से लगभग 3 टन प्रीमियम गुणवत्ता वाले आम सिलीगुड़ी भेजे गए हैं।

यह महत्वपूर्ण कदम मदनमोहन किसान उत्पादक कंपनी द्वारा राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम के विशेष सहयोग से उठाया गया है।इस सीधे व्यापार से किसानों की आमदनी और कीमत प्राप्ति में एक बड़ा और सकारात्मक उछाल देखने को मिला है। पिछले साल जहां किसानों को आम के लिए लगभग 25 रुपये प्रति किलो का भाव मिल रहा था।

वहीं इस बार उन्हें सीधे 45 रुपये प्रति किलो की शानदार कीमत प्राप्त हुई है। यह पूरी व्यवस्था ओडिशा के बागवानी निदेशालय द्वारा चलाए जा रहे एक विशेष कार्यक्रम का हिस्सा है। इसका मुख्य उद्देश्य किसान उत्पादक संगठनों के माध्यम से किसानों को बिचौलियों से मुक्त कर सीधे बड़े बाजारों तक पहुंचाना और उन्हें बेहतर विकल्प उपलब्ध कराना है।

अधिकारियों का कहना है कि सिलीगुड़ी भेजी गई खेप में आम की गुणवत्ता पूरी तरह से बाजार के उच्च मानकों पर खरी उतरी है। इससे न केवल खरीदारों का भरोसा काफी बढ़ा है, बल्कि भविष्य के लिए नए व्यापारिक संबंध भी मजबूती से स्थापित हुए हैं। अब राज्य सरकार इस सफल मॉडल को और अधिक विस्तार देने की दिशा में तेजी से काम कर रही है।

पिछले साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो ओडिशा से 11 से अधिक देशों में कुल 120 टन से ज्यादा आम का सफलतापूर्वक निर्यात किया गया था। इस बार राज्य ने अपनी महत्वाकांक्षा बढ़ाते हुए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों को मिलाकर 500 टन से अधिक आम व्यापार का एक बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया है।

यह लक्ष्य किसानों के लिए तरक्की के नए रास्ते खोलेगा। यह सफल पहल स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि बेहतर बाजार संपर्क और संगठित विपणन प्रणाली के जरिए किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है।

निष्कर्ष: ओडिशा ने कृषि विपणन के क्षेत्र में एक नई और प्रेरणादायक मिसाल पेश की है। बिचौलियों की श्रृंखला को हटाकर और किसान उत्पादक संगठनों (FPO) को सशक्त बनाकर, राज्य ने न केवल किसानों के लाभ को लगभग दोगुना किया है, बल्कि उनके आत्मविश्वास को भी नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है।

25 रुपये से 45 रुपये तक का यह सफर केवल कीमत में वृद्धि नहीं, बल्कि एक सुव्यवस्थित और दूरदर्शी नीति की जीत है। 500 टन के महात्वाकांक्षी लक्ष्य और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच के साथ, ओडिशा का यह ‘मैंगो मॉडल’ यह सिद्ध करता है कि यदि सही तकनीकी मार्गदर्शन और बाजार संपर्क मिले, तो भारतीय किसान न केवल आत्मनिर्भर बन सकते हैं, बल्कि वैश्विक बाजार के प्रमुख खिलाड़ी के रूप में भी उभर सकते हैं।

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