हरियाणा मंडी घोटाला: किसानों के नाम पर बाहरी गेहूं की फर्जी एंट्री, 5 आढ़तियों पर केस दर्ज

हरियाणा की मंडियों से सामने आया यह मामला किसानों के लिए बहुत बड़ा सवाल खड़ा करता है। इंद्री नई अनाज मंडी और ब्याना सब यार्ड में गेहूं खरीद के दौरान बड़ा घोटाला पकड़ा गया है, जहां जांच में खुलासा हुआ कि उत्तर प्रदेश और दूसरे राज्यों से गेहूं लाकर उसे हरियाणा के किसानों के नाम पर ई-खरीद पोर्टल में चढ़ाया गया।

इस पूरे मामले में 5 आढ़तियों और फर्मों के खिलाफ धोखाधड़ी के केस दर्ज किए गए हैं। सबसे चिंता की बात यह है कि जिस सरकारी खरीद व्यवस्था को किसानों के हित और पारदर्शिता के लिए बनाया गया था, उसी सिस्टम का गलत इस्तेमाल करके फर्जी एंट्री की गई।

जांच में सामने आया कि बाहर से आया गेहूं हरियाणा किसानों के नाम पर पोर्टल में दर्ज किया गया और सरकारी खरीद का फायदा उठाने की कोशिश हुई। इससे असली किसानों का नुकसान होता है और मंडी व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं। किसानों को समझना होगा कि इस तरह के फर्जीवाड़े का सबसे बड़ा असर ईमानदार किसानों पर पड़ता है।

जब पोर्टल पर गलत रिकॉर्ड चढ़ते हैं तो असली किसान की फसल की एंट्री, भुगतान और खरीद प्रक्रिया प्रभावित होती है। कई बार किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है जबकि सिस्टम में पहले से फर्जी स्टॉक दिखाया जा चुका होता है। जांच में यह भी सामने आया कि गेहूं की बोरियों को पहले उठाने के लिए अवैध लेनदेन किया गया।

यह केवल नियमों का उल्लंघन नहीं बल्कि सरकारी खरीद व्यवस्था को कमजोर करने वाली कार्रवाई है। अगर समय रहते ऐसे मामलों पर सख्ती नहीं हुई तो आने वाले समय में किसानों का भरोसा पूरी व्यवस्था से उठ सकता है। मार्केट कमेटी अधिकारियों के अनुसार कुछ आढ़तियों से मार्केट फीस भी जमा करवाई गई है और पुलिस अब दस्तावेजों की गहराई से जांच कर रही है।

यह कार्रवाई इसलिए जरूरी है ताकि भविष्य में कोई भी किसान के नाम पर फर्जी खरीद करने की हिम्मत न कर सके। आज जरूरत इस बात की है कि किसान खुद भी अपनी फसल, जमीन और पोर्टल रिकॉर्ड पर नजर रखें। अपनी फसल की एंट्री, रजिस्ट्रेशन और भुगतान की जानकारी समय-समय पर जांचते रहें।

अगर कहीं गड़बड़ी दिखाई दे तो तुरंत मंडी सचिव या संबंधित विभाग को शिकायत दें। सरकारी खरीद प्रणाली तभी मजबूत होगी जब किसान, प्रशासन और मंडी व्यवस्था तीनों ईमानदारी से काम करें। असली किसान की मेहनत का हक किसी भी कीमत पर फर्जी कारोबारियों को नहीं मिलना चाहिए। खेती पहले ही लागत, मौसम और बाजार की मार झेल रही है।

ऐसे में खरीद व्यवस्था में पारदर्शिता बहुत जरूरी है। किसानों को जागरूक रहना अब खेती का भी हिस्सा बन चुका है। अपनी फसल और अपने अधिकारों की जानकारी रखना उतना ही जरूरी है जितना खेत में मेहनत करना। उम्मीद है कि इस मामले में सख्त कार्रवाई होगी और भविष्य में किसानों के नाम पर होने वाले ऐसे घोटालों पर रोक लगेगी।

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