छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के थानाबोड़ी गांव की लेखेश बाई आज देशभर के किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी हैं। उन्होंने साबित कर दिया है कि अगर सही तकनीक और इच्छाशक्ति हो, तो एक छोटी सी जोत को भी मुनाफे वाले व्यवसाय में बदला जा सकता है। वर्षा आधारित खेती से शुरुआत करने वाली लेखेश बाई आज सालाना लगभग 40 लाख रुपये की आय अर्जित कर रही हैं।
लेखेश बाई का सफर केवल चार एकड़ जमीन से शुरू हुआ था, जहाँ वे पारंपरिक रूप से धान और मक्का उगाती थीं। उस समय उनकी आय मात्र 2 लाख रुपये तक सीमित थी, जिसका मुख्य कारण सिंचाई सुविधाओं का अभाव और मौसम पर निर्भरता थी। लेकिन 2012 में कृषि विज्ञान केंद्र से उनके जुड़ाव ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी।
कृषि विज्ञान केंद्र से मिले तकनीकी मार्गदर्शन और प्रशिक्षण के बाद उन्होंने पारंपरिक खेती को अलविदा कहकर एकीकृत कृषि प्रणाली को अपनाया। सरकारी विभागों के सहयोग से उनके खेत में ट्यूबवेल लगा और बागवानी विभाग की मदद से उन्होंने ड्रिप सिंचाई प्रणाली को अपनाया। आज उनकी 17 एकड़ जमीन पूरी तरह सिंचित और उपजाऊ है।
लेखेश बाई का खेती मॉडल काफी विविधतापूर्ण है। उन्होंने अपनी जमीन के 12 एकड़ हिस्से में ड्रिप सिंचाई के जरिए सब्जियों का उत्पादन शुरू किया है। इसके साथ ही, 3 एकड़ में चारा उत्पादन, मछली और बत्तख पालन, बकरी पालन और पोल्ट्री जैसी गतिविधियों को भी जोड़ा गया है। उनके पास 40 पशुओं वाली एक आधुनिक डेयरी इकाई भी है।
उनकी सफलता का एक बड़ा रहस्य मूल्य वर्धन है। वे केवल दूध नहीं बेचतीं, बल्कि उससे पनीर और घी तैयार कर बाजार में बेचती हैं, जिससे उन्हें अधिक मुनाफा मिलता है। खेत के संसाधनों का पुनर्चक्रण करने से उनकी लागत कम हुई है और साल भर रोजगार सुनिश्चित रहता है।
उनकी इन असाधारण उपलब्धियों के लिए उन्हें इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से कई पुरस्कार मिल चुके हैं। अब उनका फार्म केवल एक खेत नहीं, बल्कि एक जीवंत प्रशिक्षण केंद्र है, जहाँ हर साल करीब 850 किसान और महिलाएं वैज्ञानिक खेती के गुर सीखने आते हैं।
लेखेश बाई की यह कहानी ग्रामीण भारत के उस बदलाव को दिखाती है, जहाँ महिलाएं वैज्ञानिक मार्गदर्शन और संस्थागत सहयोग से खेती को जलवायु-सहिष्णु और आर्थिक रूप से मजबूत बना रही हैं। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि नवाचार और मेहनत से खेती को एक सम्मानजनक और लाभकारी करियर बनाया जा सकता है।
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