पंजाब के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने चालू रबी विपणन सत्र के लिए गेहूं खरीद का अपना महा-अभियान सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। खरीद प्रक्रिया के औपचारिक समापन के साथ ही अब राज्य की सभी 1,872 मंडियों और खरीद केंद्रों को बंद कर दिया गया है।
इस बार पंजाब ने 123 लाख टन गेहूं की खरीद की, जो केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित 122 लाख टन के लक्ष्य से भी अधिक रही। प्रदेश में खरीद सीजन की शुरुआत चुनौतियों भरी रही। 1 अप्रैल से खरीद शुरू तो हुई, लेकिन बेमौसम बारिश ने कटाई की रफ्तार धीमी कर दी जिससे शुरुआती दिनों में मंडियों में रौनक कम रही।
हालांकि, 10 अप्रैल के बाद मौसम खुलते ही आवक में ऐसा सैलाब आया कि एक ही दिन में 12 लाख टन से अधिक गेहूं मंडियों में पहुंचने लगा। इस अचानक बढ़े दबाव ने लॉजिस्टिक और प्रबंधन व्यवस्था की कड़ी परीक्षा ली, लेकिन विभाग ने इसे बखूबी संभाला। इस साल बाजार का एक दिलचस्प पहलू निजी खरीदारों की बेरुखी रही।
जहाँ पिछले वर्ष निजी व्यापारियों ने लगभग 7 लाख टन गेहूं खरीदा था, वहीं इस बार यह आंकड़ा घटकर महज 1.51 लाख टन पर सिमट गया। इसका सीधा परिणाम यह हुआ कि राज्य की सरकारी एजेंसियों को लगभग पूरी उपज खुद ही खरीदनी पड़ी।
सरकार ने किसानों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए 2,585 रुपये प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अब तक कुल 30,683 करोड़ रुपये सीधे बैंक खातों में भेज दिए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि तमाम प्राकृतिक और तकनीकी बाधाओं के बावजूद, पंजाब ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में उसकी भूमिका केंद्रीय और अपरिहार्य है।
निष्कर्ष: तमाम प्राकृतिक चुनौतियों और निजी खरीदारों की बेरुखी के बावजूद, पंजाब ने इस रबी विपणन सत्र में लक्ष्य से अधिक 123 लाख टन गेहूं की रिकॉर्ड खरीद कर देश की खाद्य सुरक्षा में अपनी अपरिहार्य भूमिका को एक बार फिर साबित किया है।
शुरुआती बेमौसम बारिश और अचानक बढ़ी आवक के लॉजिस्टिक्स दबाव को सरकारी तंत्र ने बेहतरीन प्रबंधन से संभाला, जिसके परिणामस्वरूप किसानों को 2,585 रुपये प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर 30,683 करोड़ रुपये का सीधा भुगतान उनके खातों में किया गया।
यह सफल महा-अभियान संकट के समय में किसानों के प्रति सरकारी प्रतिबद्धता और भारतीय कृषि व्यवस्था में पंजाब के केंद्रीय महत्व को रेखांकित करता है।
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