खाद के साथ जबरन दवाई, माइक्रोन्यूट्रिएंट, बायो प्रोडक्ट और दूसरी सामग्री थमाने की शिकायतों के बीच अब मध्यप्रदेश सरकार ने बड़ा आदेश जारी किया है। आदेश के मुताबिक अब खाद विक्रेताओं को यूरिया, डीएपी और कॉम्प्लेक्स उर्वरकों के साथ गैर-अनुदानित उत्पादों की अनिवार्य टैगिंग करने से रोका गया है।
कागज़ों में यह फैसला किसानों के हित में बड़ा कदम माना जा रहा है, क्योंकि लंबे समय से किसान शिकायत कर रहे थे कि बिना जरूरत के महंगे उत्पाद खाद के साथ जबरदस्ती दिए जाते हैं। इससे खेती की लागत लगातार बढ़ रही थी। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह आदेश जमीन पर भी लागू होगा?
क्या अब किसान को सिर्फ वही खाद मिलेगी जिसकी उसे जरूरत है? या फिर पुराने तरीके नए नाम से जारी रहेंगे? कई किसानों का कहना है कि खाद लेने जाते समय उन्हें मजबूरी में अतिरिक्त उत्पाद खरीदने पड़ते थे। कई बार दुकानदार साफ कहते थे कि अगर दूसरी दवा या प्रोडक्ट नहीं लोगे तो खाद भी नहीं मिलेगी। ऐसे में छोटे और सीमांत किसानों पर सबसे ज्यादा आर्थिक बोझ पड़ता था।
सरकारी आदेश में साफ कहा गया है कि कंपनियों और विक्रेताओं को सिर्फ अनुमत उर्वरकों की बिक्री करनी होगी और अनुदानित खाद के साथ गैर-अनुदानित उत्पादों की जबरन बिक्री पर रोक रहेगी। अब देखने वाली बात होगी कि जिलास्तर पर अधिकारी इस आदेश का कितना सख्ती से पालन करवाते हैं।
अगर यह फैसला सही तरीके से लागू हुआ तो किसानों की लागत कम हो सकती है और खाद वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता आ सकती है। लेकिन अगर सिर्फ आदेश जारी होकर फाइलों तक सीमित रह गया, तो किसानों की समस्या जस की तस बनी रहेगी।
निष्कर्ष: मध्यप्रदेश सरकार का यह आदेश कागजों पर किसानों को जबरन थोपे जाने वाले अतिरिक्त आर्थिक बोझ से राहत देने वाला एक सराहनीय और बड़ा कदम है, जो खेती की बढ़ती लागत को कम करने और खाद वितरण में पारदर्शिता लाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है।
हालांकि, इस फैसले की असली सफलता इसके जमीनी क्रियान्वयन पर निर्भर करती है; अगर जिला स्तर के अधिकारी और प्रशासन सख्त निगरानी के साथ कालाबाजारी और दुकानदारों की मनमानी को रोकने में कामयाब रहते हैं, तभी छोटे और सीमांत किसानों को इसका वास्तविक लाभ मिल पाएगा, अन्यथा यह आदेश भी महज एक सरकारी फाइल तक ही सीमित रह जाएगा।
यह भी पढ़े: वैश्विक मांग कमजोर पड़ने से भारत के मसाला निर्यात में गिरावट
जागरूक रहिए व नुकसान से बचिए और अन्य लोगों के जागरूकता के लिए साझा करें। कृषि लेख, सरकारी योजनाएं, कृषि तकनीक, व्यवसायिक एवं जैविक खेती से संबंधित सटीक जानकारियां प्राप्त करने के लिए जुड़े कृषि जागृति चलो गांव की ओर से या कृषि संबंधित किसी भी समस्या के जैविक समाधान के लिए WhatsApp करें।

मेरा नाम Anil Kumar Prasad है। मैं एक प्रगतिशील किसान हूं और पिछले 5 वर्षों से खेती की बारीकियों को धरातल पर सीख और समझ रहा हूं। ‘कृषि जागृति – चलो गांव की ओर’ के माध्यम से मैं अपने निजी अनुभव और खेती की सटीक जानकारी साझा करता हूं। मेरा उद्देश्य सरकारी योजनाओं, आधुनिक तकनीक और जैविक खेती के जरिए साथी किसानों को सशक्त बनाना है।
