जापान ने भारतीय उपचार केंद्रों में फ्यूमिगेशन और डिसइन्फेक्शन की प्रक्रियाओं में कमियां मिलने के बाद भारत से ताजे आमों के आयात पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। यह कड़ा फैसला आम के पीक सीजन के बीच भारतीय निर्यातकों के लिए एक बहुत बड़े झटके की तरह आया है। जापानी अधिकारियों ने बीते मार्च महीने में भारत के ट्रीटमेंट सेंटर्स का दौरा किया था, जहां फलों को कीटों से मुक्त रखने वाली इन अनिवार्य प्रक्रियाओं में खामियां पाई गई थीं।
इस निरीक्षण के बाद योकोहामा प्लांट प्रोटेक्शन एसोसिएशन ने सभी आयातकों को सख्त निर्देश जारी कर दिए हैं। इसके तहत भारतीय अधिकारियों द्वारा 25 मार्च या उसके बाद जारी किए गए निरीक्षण प्रमाणपत्रों वाली आम की किसी भी खेप को स्वीकार नहीं किया जाएगा। यह प्रतिबंध तब तक लागू रहेगा जब तक कि जापान इन केंद्रों के तय परिचालन मानकों पर पूरी तरह से संतुष्ट नहीं हो जाता।
जापान के इस कदम से अप्रैल से जून तक चलने वाले आम के सबसे अहम निर्यात सीजन पर अचानक ब्रेक लग गया है। हालांकि, भारतीय और जापानी अधिकारियों के बीच इस मसले को सुलझाने के लिए लगातार बातचीत चल रही है। इसके बावजूद निर्यातकों को इस बात का गहरा डर है कि शायद चालू सीजन के खत्म होने से पहले वहां के लिए निर्यात दोबारा शुरू न हो पाए।
भले ही जापान भारतीय आमों का सबसे बड़ा खरीदार न हो, लेकिन प्रीमियम किस्मों के लिए इसे एक बेहद अहम बाजार माना जाता है। आपको बता दें कि पिछले वित्त वर्ष में भारत ने जापान को करीब 15.4 लाख डॉलर मूल्य के आम निर्यात किए थे। इसमें विशेष रूप से गुजरात के मशहूर केसर आम की सबसे बड़ी हिस्सेदारी रही है, जिसकी वहां काफी मांग होती है।
जापान के इस झटके के साथ-साथ निर्यातक अन्य देशों में बढ़ती लॉजिस्टिक्स लागत की दोहरी मार भी झेल रहे हैं। भारत के आमों के सबसे बड़े विदेशी बाजार अमेरिका के लिए हवाई माल ढुलाई का किराया इस सीजन में आसमान छू रहा है। पिछले साल जहां यह खर्च 250 से 350 रुपये प्रति किलो था, वहीं अब यह बढ़कर 580 से 590 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। बाजार प्रतिबंध और भारी परिवहन लागत के इस मिले-जुले असर से इस बार भारत के आम निर्यात पर भारी दबाव पड़ने की आशंका है।
निष्कर्ष: जापानी मानकों के अनुरूप भारतीय उपचार केंद्रों (ट्रीटमेंट सेंटर्स) में फ्यूमिगेशन और डिसइन्फेक्शन प्रक्रियाओं में कमियां पाए जाने के कारण जापान द्वारा भारतीय ताजे आमों के आयात पर लगाया गया प्रतिबंध चालू सीजन में भारतीय आम निर्यातकों के लिए एक बड़ा संकट बन गया है।
हालांकि दोनों देशों के अधिकारी इस मुद्दे को सुलझाने के प्रयास में जुटे हैं, लेकिन वर्तमान पीक सीजन (अप्रैल से जून) में निर्यात के दोबारा शुरू होने की संभावना बेहद कम नजर आ रही है।
प्रीमियम ‘केसर’ आम के लिए जापान जैसे महत्वपूर्ण बाजार का हाथ से निकलना और दूसरी तरफ अमेरिका जैसे बड़े बाजारों के लिए हवाई माल ढुलाई (लॉजिस्टिक्स) की लागत का लगभग दोगुना हो जाना, भारतीय आम निर्यात क्षेत्र पर एक दोहरी मार है, जिससे इस वर्ष भारत के कुल आम निर्यात और राजस्व पर भारी दबाव पड़ना तय है।
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