देशभर में मौसम की मार, प्रमुख उत्पादक राज्यों से कम आवक और मौसमी आपूर्ति में आई भारी कमी के कारण टमाटर की कीमतों में जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के बाद नई फसल की आवक शुरू होने तक टमाटर के दाम इसी तरह ऊंचे स्तर पर बने रह सकते हैं।
टमाटर की इस किल्लत के पीछे मुख्य रूप से मौसम की बेरुखी जिम्मेदार है। महाराष्ट्र, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश जैसे देश के शीर्ष उत्पादक राज्यों में भीषण हीटवेव यानी लू और अनियमित मानसूनी वर्षा के कारण फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। इसके चलते मंडियों में टमाटर की आवक काफी घट गई है।
उपभोक्ता मामले विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, देश में टमाटर का औसत खुदरा मूल्य बढ़कर अब 43.70 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गया है। यह कीमत पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 24 प्रतिशत और महज एक महीने पहले की तुलना में 26 प्रतिशत अधिक है।
खुदरा बाजार के मुकाबले थोक मंडियों में कीमतों की तेजी और ज्यादा चौंकाने वाली है। द फाइनेंशियल एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली की प्रसिद्ध आजादपुर मंडी में टमाटर का भाव बढ़कर लगभग 2,700 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है, जो पिछले साल के मुकाबले करीब 66 प्रतिशत अधिक है।
दूसरी ओर, उपभोक्ता मामले विभाग के आंकड़ों में टमाटर का मॉडल थोक मूल्य 3,000 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया है, जिसमें साल-दर-साल के आधार पर लगभग 50 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी देखी गई है। टमाटर की इन आसमान छूती कीमतों ने अब आम आदमी के घरेलू बजट पर सीधा और गहरा असर डालना शुरू कर दिया है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अकेले मई महीने में टमाटर की महंगाई दर 48.43 प्रतिशत के रिकॉर्ड स्तर पर रही, जिसने देश की कुल खाद्य मुद्रास्फीति को बढ़ाने में सबसे बड़ा योगदान दिया। इसी अवधि में देश की कुल खाद्य मुद्रास्फीति भी बढ़कर 4.78 प्रतिशत दर्ज की गई। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में मानसून की स्थिति पूरी तरह नहीं सुधरती और खेतों से नई फसल की आवक बाजार में नहीं बढ़ती, तब तक आपूर्ति पर यह दबाव इसी तरह बना रहेगा। ऐसे में आने वाले कुछ सप्ताहों तक आम उपभोक्ताओं को टमाटर की कीमतों से कोई बड़ी राहत मिलने की संभावना बेहद कम है।
निष्कर्ष: मौसम की बेरुखी (भीषण लू और अनियमित मानसून) के कारण देश के प्रमुख उत्पादक राज्यों में टमाटर की फसलों को भारी नुकसान हुआ है, जिससे मंडियों में इसकी आवक काफी कम हो गई है। आपूर्ति में आई इस भारी कमी की वजह से थोक और खुदरा बाजारों में टमाटर की कीमतों में 24% से लेकर 66% तक का जबरदस्त उछाल आया है, जिसने मई महीने में टमाटर की महंगाई दर को रिकॉर्ड 48.43% पर पहुंचा दिया।
आपूर्ति पर बना यह दबाव न केवल आम उपभोक्ता के घरेलू बजट को सीधे प्रभावित कर रहा है, बल्कि देश की कुल खाद्य मुद्रास्फीति को भी बढ़ा रहा है; और विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून के बाद नई फसल की आवक शुरू होने तक आने वाले कुछ हफ्तों में इस स्थिति से राहत मिलने की संभावना बेहद कम है।
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