मानसून में देरी से मक्का के भाव उछले, गेहूं की कीमतों में भी आई तेजी

देश की प्रमुख अनाज मंडियों में कीमतों का रुख मिला-जुला दर्ज किया गया है। कमजोर मानसून के असर के कारण मक्का और गेहूं की कीमतों में चुनिंदा बाजारों में मजबूती देखी गई है, जबकि स्थिर मांग के बीच चावल के भाव लगभग अपरिवर्तित बने हुए हैं।इंदौर मंडी में मक्का का भाव 125 रुपए बढ़कर 2,300 रुपए प्रति क्विंटल के स्तर पर पहुंच गया है।

व्यापारियों के अनुसार, मानसून की धीमी रफ्तार के कारण खरीफ फसलों की बुवाई में देरी हुई है, जिससे आने वाले समय में आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। मक्के के साथ-साथ गेहूं की कीमतों में भी मध्य और पश्चिम भारत की कुछ प्रमुख मंडियों में तेजी का रुख रहा। इंदौर मंडी में गेहूं 20 रुपए मजबूत होकर 2,660 प्रति क्विंटल पर पहुंच गया।

वहीं राजस्थान की कोटा मंडी में गेहूं की कीमतों में 100 रुपए की उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस तेजी के बाद कोटा में गेहूं 2,425 से 2,475 रुपए प्रति क्विंटल के दायरे में कारोबार करता नजर आया। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, संभावित एल नीनो परिस्थितियों से आगामी रबी फसल प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है।

इसके साथ ही मंडियों में कम आवक और सरकार द्वारा गेहूं स्टॉक की खुले बाजार में बिक्री के लिए जारी निविदाएं (टेंडर्स) रद्द किए जाने से कीमतों को बड़ा समर्थन मिला है। दूसरी तरफ, नवी मुंबई के बाजार में चावल की कीमतें पूरी तरह स्थिर बनी रहीं, क्योंकि घरेलू मांग में कोई बड़ा बदलाव नहीं देखा गया।

हालांकि, व्यापारियों का मानना है कि आने वाले हफ्तों में बासमती चावल की कीमतों में अच्छी मजबूती आ सकती है। इस संभावित तेजी के पीछे पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) के देशों से भारतीय चावल की खरीद बढ़ने की उम्मीद है। भारतीय चावल निर्यात के लिए सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग हॉर्मुज जलडमरूमध्य के दोबारा खुलने से व्यापारिक गतिविधियों में बड़ा सुधार होने की संभावना है।

निष्कर्ष: मानसून की धीमी रफ्तार और आगामी रबी सीजन पर एल नीनो के संभावित संकट ने देश की प्रमुख मंडियों में खाद्यान्न कीमतों को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। बुवाई में देरी और खुले बाजार में सरकारी निविदाएं रद्द होने से जहां मक्का और गेहूं की कीमतों में उल्लेखनीय उछाल दर्ज किया गया है, वहीं घरेलू स्तर पर चावल के भाव फिलहाल स्थिर बने हुए हैं।

हालांकि, हॉर्मुज जलडमरूमध्य के दोबारा खुलने और मिडिल ईस्ट से मांग बढ़ने की उम्मीदों के चलते आने वाले समय में बासमती चावल की कीमतों में भी तेजी आने के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं, जो कुल मिलाकर बाजार में आने वाले दिनों में और अधिक मजबूती की ओर इशारा करता है।

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