इन दिनों देश के कई हिस्सों में किसानों को डीएपी (DAP) उर्वरक की उपलब्धता को लेकर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जहां डीएपी मिल भी रही है, वहां सीमित मात्रा में उपलब्ध है। दूसरी ओर एनपीके उर्वरकों के दाम भी लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि रोपाई के समय डीएपी उपलब्ध न हो तो क्या करें?
क्या बिना फास्फोरस के अच्छी धान की फसल ली जा सकती है? और क्या कुछ ऐसे वैज्ञानिक विकल्प हैं जिनसे कम लागत में पौधों की अच्छी शुरुआत कराई जा सके? सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि धान की शुरुआती बढ़वार में फास्फोरस (Phosphorus) सबसे महत्वपूर्ण पोषक तत्वों में से एक है।
यह पौधों की जड़ों के विकास, नई कोशिकाओं के निर्माण, शुरुआती वृद्धि और अधिक कल्ले बनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि रोपाई के समय फास्फोरस की कमी रह जाए, तो पौधे कमजोर रह जाते हैं, जड़ें अच्छी तरह विकसित नहीं हो पातीं और बाद में अधिक खाद देने के बावजूद उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
पहले यह माना जाता था कि यदि गेहूं में पर्याप्त फास्फोरस दिया गया है तो धान में इसकी आवश्यकता कम होगी। लेकिन आज उच्च उत्पादन देने वाली नई किस्मों और आधुनिक खेती में पोषक तत्वों की मांग पहले की तुलना में काफी बढ़ चुकी है। इसलिए धान की फसल में भी शुरुआती अवस्था में फास्फोरस की उपलब्धता अत्यंत आवश्यक हो गई है।
यदि बाजार में डीएपी उपलब्ध नहीं है या पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल रही है, तो किसान नैनो डीएपी (Nano DAP) का उपयोग जड़ उपचार (Root Treatment) के लिए कर सकते हैं। नैनो डीएपी में अत्यंत सूक्ष्म कण होते हैं जो पौधों की जड़ों के संपर्क में आकर शुरुआती अवस्था में फास्फोरस की उपलब्धता बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। हालांकि यह पारंपरिक डीएपी का पूर्ण विकल्प नहीं माना जाता, लेकिन शुरुआती विकास में सहायक विकल्प के रूप में इसका उपयोग किया जा सकता है।
धान की रोपाई से पहले जड़ उपचार (Root Dip Treatment) अपनाना एक अत्यंत प्रभावी और कम लागत वाला तरीका है। नर्सरी से पौध उखाड़ने के बाद पौधों के गुच्छों को कुछ समय के लिए उपचारित घोल में डुबोकर रखा जाता है और उसके बाद रोपाई की जाती है। इससे पौधों को शुरुआती सुरक्षा और बेहतर स्थापना (Establishment) मिलती है।
झंडा पत्ता रोग से बचाव
यदि आपके क्षेत्र में झंडा पत्ता (Leaf Blast या संबंधित प्रारंभिक फफूंदजनित समस्या) की समस्या आती है, तो विशेषकर Pusa-1509, PR-1692 जैसी किस्मों में, तो जड़ उपचार के दौरान थायोफेनेट मिथाइल (Thiophanate Methyl) आधारित फफूंदनाशी का उपयोग किया जा सकता है। सामान्यतः लगभग 250 ग्राम दवा प्रति एकड़ की पौध के लिए पर्याप्त मानी जाती है। पानी से भरी नाली या टंकी में दवा घोलकर पौधों के बंडलों को कुछ समय तक उसमें डुबोकर रखने के बाद रोपाई की जा सकती है। इससे शुरुआती रोगों का खतरा काफी कम हो सकता है।
दीमक की समस्या का कम लागत में समाधान
यदि खेत में दीमक की समस्या रहती है, विशेषकर जहां पेड़ अधिक हों या अधसड़ा जैविक पदार्थ अधिक मात्रा में मौजूद हो, तो जड़ उपचार के दौरान क्लोरपायरीफॉस (Chlorpyrifos) का सीमित मात्रा में उपयोग भी कई किसान करते हैं। सामान्यतः जहां पूरे खेत में एक लीटर तक दवा डालने की आवश्यकता पड़ सकती है, वहीं जड़ उपचार विधि में लगभग 250 मिलीलीटर दवा से भी अच्छा प्रारंभिक संरक्षण मिल सकता है। इससे दवा की मात्रा, लागत और श्रम तीनों की बचत होती है।
कई किसान जड़ उपचार में जैविक उत्पादों का भी उपयोग करते हैं। लाभकारी सूक्ष्मजीव आधारित उत्पाद, जैव उर्वरक तथा माइकोराइजा जैसी तकनीकों का उपयोग जड़ों की वृद्धि बढ़ाने और पौधों की शुरुआती स्थापना में सहायक हो सकता है। इससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता भी कुछ हद तक कम की जा सकती है।
जड़ उपचार करने की सबसे आसान विधि यह है कि नर्सरी से पौध उखाड़ने के बाद उनके बंडल बना लें। खेत की मेड़ या पानी वाली छोटी टैब में 25 लीटर पानी लें और 250 मिली जी-डर्मा प्लस या जी-बायो फास्टफेट एडवांस को मिलाएं। इसके बाद पौधों के बंडलों को उस घोल में 10 से 15 मिनट तक पौध जी जड़ों को डुबोकर रखें और फिर मुख्य खेत में सीधे रोपाई करें। यह तरीका सरल है, कम खर्चीला है और इसमें अतिरिक्त श्रम की भी आवश्यकता नहीं होती।
धान की सफल खेती केवल अधिक खाद डालने से नहीं होती, बल्कि सही पोषक तत्व, सही समय और सही तकनीक से देने पर निर्भर करती है। यदि डीएपी उपलब्ध नहीं है तो घबराने की आवश्यकता नहीं है। जड़ उपचार जैसी वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर पौधों की शुरुआती बढ़वार को मजबूत बनाया जा सकता है और बाद में संतुलित पोषण देकर बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।
यह भी पढ़े: धान में माइकोराइजा डालने वाले किसान भूलकर भी न करें ये 4 गलतियां, वरना नहीं मिलेगा पूरा फायदा
जागरूक रहिए व नुकसान से बचिए और अन्य लोगों के जागरूकता के लिए साझा करें। कृषि लेख, सरकारी योजनाएं, कृषि तकनीक, व्यवसायिक एवं जैविक खेती से संबंधित सटीक जानकारियां प्राप्त करने के लिए जुड़े कृषि जागृति चलो गांव की ओर से या कृषि संबंधित किसी भी समस्या के जैविक समाधान के लिए WhatsApp करें।

मेरा नाम Anil Kumar Prasad है। मैं एक प्रगतिशील किसान हूं और पिछले 5 वर्षों से खेती की बारीकियों को धरातल पर सीख और समझ रहा हूं। ‘कृषि जागृति – चलो गांव की ओर’ के माध्यम से मैं अपने निजी अनुभव और खेती की सटीक जानकारी साझा करता हूं। मेरा उद्देश्य सरकारी योजनाओं, आधुनिक तकनीक और जैविक खेती के जरिए साथी किसानों को सशक्त बनाना है।
