आलू की दो नई उन्नत किस्मों को मिली सरकारी मंजूरी, किसानों को मिलेगा बड़ा फायदा

केंद्र सरकार ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान द्वारा विकसित आलू की दो उन्नत किस्मों ‘कुफरी अभेद्य’ और ‘कुफरी रूबी’ को आधिकारिक रूप से अधिसूचित कर दिया है। भारत के राजपत्र में प्रकाशित इस अधिसूचना के बाद अब इन नई किस्मों के व्यावसायिक उत्पादन, सरकारी प्रमाणन और अनुशंसित राज्यों व क्षेत्रों में किसानों को गुणवत्तायुक्त बीजों की निर्बाध बिक्री का मार्ग पूरी तरह प्रशस्त हो गया है।

संस्थान के निदेशक ब्रजेश सिंह के अनुसार, इस अधिसूचना के जारी होने से नई तकनीकों और बीजों का प्रसार प्रयोगशाला से खेतों तक तेजी से होगा, जिससे देश में आलू की कुल उत्पादकता बढ़ेगी और किसानों की शुद्ध आय में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा। यह कदम देश की गुणवत्तायुक्त बीज प्रणाली को मजबूत करने के साथ-साथ जलवायु अनुकूल, रोग प्रतिरोधी और आधुनिक बाजार की मांग के अनुरूप आलू उत्पादन को बढ़ावा देगा।

कुफरी अभेद्य’ (Kufri Abhedya): लेट ब्लाइट और सिस्ट निमेटोड प्रतिरोधी किस्म

नई किस्म ‘कुफरी अभेद्य’ की खेती के लिए मुख्य रूप से हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, पूर्वोत्तर के पर्वतीय राज्यों, नीलगिरि की पहाड़ियों तथा कर्नाटक और महाराष्ट्र के पठारी क्षेत्रों को अनुशंसित किया गया है।

यह किस्म 110 से 120 दिनों की अवधि में पककर तैयार हो जाती है और खरीफ मौसम की परिस्थितियों में 25 से 30 टन प्रति हेक्टेयर तक की शानदार उपज देती है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह आलू सिस्ट निमेटोड और लेट ब्लाइट दोनों गंभीर रोगों के प्रति प्रतिरोधी क्षमता रखने वाली भारत की पहली अधिक उपज देने वाली आलू किस्म है।

कुफरी रूबी’ (Kufri Ruby): ‘बेबी पोटैटो’ और प्रोसेसिंग मार्केट के लिए उपयुक्त

दूसरी ओर, ‘कुफरी रूबी’ को विशेष रूप से ‘बेबी पोटैटो’ श्रेणी के बाजार को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। इसकी खेती के लिए हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, बिहार, असम, अरुणाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और उत्तराखंड सहित देश के प्रमुख आलू उत्पादक राज्यों की सिफारिश की गई है।

यह किस्म 23 से 25 टन प्रति हेक्टेयर तक उपज देने में सक्षम है और अपनी अनूठी बनावट के कारण ताजा उपभोग, खाद्य प्रसंस्करण तथा होटल व आतिथ्य क्षेत्र की बढ़ती जरूरतों के लिए बेहद उपयुक्त मानी जा रही है।

निष्कर्ष: केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (CPRI) द्वारा विकसित और भारत सरकार द्वारा अधिसूचित आलू की ये दो नई किस्में—’कुफरी अभेद्य’ और ‘कुफरी रूबी’—देश के कृषि क्षेत्र के लिए एक बड़ा मील का पत्थर हैं। जहाँ एक तरफ ‘कुफरी अभेद्य’ लेट ब्लाइट और सिस्ट निमेटोड जैसी घातक बीमारियों से फसल को बचाकर किसानों की लागत कम करेगी, वहीं दूसरी तरफ ‘कुफरी रूबी’ ‘बेबी पोटैटो’ और प्रोसेसिंग मार्केट की माँग को पूरा करके किसानों को प्रीमियम बाजार मूल्य दिलाएगी।

सरकारी गजट में अधिसूचना जारी होने से अब किसानों तक इन किस्मों के प्रामाणिक और रोगमुक्त बीज आसानी से पहुँच सकेंगे। सही कृषि प्रबंधन, वैज्ञानिक सलाह और इन उन्नत किस्मों के प्रयोग से किसान न केवल अपनी फसल को सुरक्षित रख सकते हैं, बल्कि अपनी शुद्ध आय में भी कई गुना इजाफा कर सकते हैं।

Frequently Asked Questions (FAQ)

Q. ‘कुफरी अभेद्य’ आलू किस्म की सबसे बड़ी खासियत क्या है?

Ans. यह भारत की पहली अधिक उपज देने वाली किस्म है जो ‘आलू सिस्ट निमेटोड’ और ‘लेट ब्लाइट’ (पछेती झुलसा) दोनों गंभीर रोगों के प्रति प्रतिरोधी है।

Q. ‘कुफरी रूबी’ आलू किस श्रेणी के बाजार के लिए सबसे उपयुक्त है?

Ans. ‘कुफरी रूबी’ को विशेष रूप से ‘बेबी पोटैटो’, ताजा उपभोग, खाद्य प्रसंस्करण और होटल/रेस्टोरेंट उद्योग की मांग के लिए विकसित किया गया है।

Q. ‘कुफरी अभेद्य’ किस्म कितने दिनों में पककर तैयार होती है और इसकी उपज कितनी है?

Ans. यह किस्म 110 से 120 दिनों में तैयार हो जाती है और खरीफ मौसम में 25 से 30 टन प्रति हेक्टेयर तक उपज देती है।

Q. क्या बिहार और उत्तर प्रदेश के किसान ‘कुफरी रूबी’ की खेती कर सकते हैं?

Ans. जी हाँ, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात सहित देश के प्रमुख आलू उत्पादक राज्यों में ‘कुफरी रूबी’ की सिफारिश की गई है।

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