धान की फसल में खरपतवार नियंत्रण को हल्के में लेना किसानों के लिए सबसे महंगी गलती साबित हो सकती है। यदि रोपाई के बाद शुरुआती 30 से 45 दिनों तक खेत में खरपतवार का प्रभावी नियंत्रण नहीं किया जाता, तो धान की उपज में 20% से 60% तक की कमी आ सकती है। यही कारण है कि समय पर सही खरपतवारनाशी का चुनाव और उसका वैज्ञानिक तरीके से उपयोग करना बेहद आवश्यक है।
खरपतवार के प्रकार और सही दवा का चुनाव (Post-Emergence)
यदि आपके खेत में खरपतवार पहले से निकल चुके हैं, तो पोस्ट-इमर्जेंस (Post-Emergence) खरपतवारनाशी का प्रयोग करें। दवा का चुनाव इस बात पर निर्भर करता है कि खेत में किस प्रकार के खरपतवार मौजूद हैं।
यदि खेत में मुख्य रूप से चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार और मोथा (Sedges) हैं, तो बिसपाइरिबैक सोडियम 10% SC एक प्रभावी विकल्प है। इसकी अनुशंसित मात्रा 100 से 120 मिलीलीटर प्रति एकड़ है। इसे 120 से 150 लीटर साफ पानी में घोलकर समान रूप से छिड़काव करें। यह दवा छोटे और सक्रिय रूप से बढ़ रहे खरपतवारों पर बेहतर प्रभाव दिखाती है।
यदि खेत में संकरी पत्ती वाले खरपतवार, चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार और मोथा तीनों प्रकार के खरपतवार एक साथ मौजूद हैं, तो फेनॉक्सासुलाम 5% EC का प्रयोग अधिक उपयुक्त माना जाता है। इसकी अनुशंसित मात्रा 400 से 500 मिलीलीटर प्रति एकड़ है। इसे भी 120 से 150 लीटर पानी में मिलाकर समान रूप से छिड़काव करें।
छिड़काव का सबसे उपयुक्त समय और खेत की स्थिति
स्प्रे करने का सबसे उपयुक्त समय रोपाई के 15 से 25 दिन बाद होता है, जब खरपतवार 2 से 4 पत्ती अवस्था में हों। इसी अवस्था में खरपतवार दवा के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील होते हैं और नियंत्रण बेहतर मिलता है।
स्प्रे के समय खेत में नमी और पानी का प्रबंधन
स्प्रे करते समय खेत में लगभग 2 से 3 सेंटीमीटर पानी होना चाहिए। छिड़काव के बाद कम से कम 24 घंटे तक खेत का पानी बाहर न निकालें, ताकि दवा का पूरा प्रभाव खरपतवारों पर पड़ सके। यदि संभव हो तो अगले 2 से 3 दिनों तक पानी का स्तर बनाए रखें।
कीटनाशक और खरपतवारनाशी छिड़काव में रखें ये सावधानियां
सही पहचान: कुछ महत्वपूर्ण सावधानियां भी जरूर अपनाएं। सबसे पहले खेत में मौजूद खरपतवार की सही पहचान करें और उसी के अनुसार दवा का चयन करें।
सटीक मात्रा: अनुशंसित मात्रा से अधिक दवा का प्रयोग न करें, क्योंकि इससे फसल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है और अनावश्यक लागत भी बढ़ती है।
मौसम का ध्यान: तेज हवा, बारिश की संभावना या वर्षा के दौरान छिड़काव करने से बचें, क्योंकि इससे दवा बह सकती है या समान रूप से नहीं लगती।
उपकरण और पानी: स्प्रे के लिए हमेशा साफ पानी और अच्छी तरह कैलिब्रेट किए गए स्प्रेयर का उपयोग करें। दवा घोलने से पहले टंकी को साफ कर लें और छिड़काव के दौरान लगातार घोल को हिलाते रहें ताकि दवा समान रूप से मिलती रहे।
सुरक्षा: छिड़काव के समय दस्ताने, मास्क और अन्य आवश्यक सुरक्षा उपकरणों का उपयोग करना भी जरूरी है।
समेकित खरपतवार प्रबंधन (Integrated Weed Management)
यदि खेत में खरपतवार बहुत अधिक बड़े हो चुके हैं या लंबे समय से नियंत्रण नहीं किया गया है, तो केवल रासायनिक नियंत्रण पर निर्भर रहने के बजाय आवश्यकता अनुसार हाथ से निराई या अन्य समेकित खरपतवार प्रबंधन (Integrated Weed Management) अपनाना अधिक लाभदायक हो सकता है।
निष्कर्ष: सही समय, सही दवा और सही मात्रा का पालन करके धान की फसल को खरपतवारों से सुरक्षित रखा जा सकता है। इससे पोषक तत्व, पानी और धूप का अधिकतम लाभ फसल को मिलेगा, पौधों की बढ़वार बेहतर होगी और अंततः उपज एवं लाभ दोनों में वृद्धि होगी।
Frequently Asked Questions (FAQ)
Q. धान में पोस्ट-इमर्जेंस (Post-Emergence) खरपतवारनाशी का छिड़काव कब करना चाहिए?
Ans. रोपाई के 15 से 25 दिन बाद जब खरपतवार 2 से 4 पत्ती की अवस्था में हों, तब छिड़काव करना सबसे ज्यादा असरदार होता है।
Q. धान के खेत में चौड़ी पत्ती और मोथा खरपतवार के लिए कौन सी दवा सबसे अच्छी है?
Ans. चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार और मोथा के लिए बिसपाइरिबैक सोडियम 10% SC (100-120 मिलीलीटर प्रति एकड़) सबसे प्रभावी मानी जाती है।
Q. खरपतवारनाशी का छिड़काव करते समय खेत में पानी की क्या स्थिति होनी चाहिए?
Ans. छिड़काव के समय खेत में 2 से 3 सेंटीमीटर पानी होना चाहिए और स्प्रे के बाद कम से कम 24 घंटे तक पानी को खेत से बाहर नहीं निकालना चाहिए।
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मेरा नाम Anil Kumar Prasad है। मैं एक प्रगतिशील किसान हूं और पिछले 5 वर्षों से खेती की बारीकियों को धरातल पर सीख और समझ रहा हूं। ‘कृषि जागृति – चलो गांव की ओर’ के माध्यम से मैं अपने निजी अनुभव और खेती की सटीक जानकारी साझा करता हूं। मेरा उद्देश्य सरकारी योजनाओं, आधुनिक तकनीक और जैविक खेती के जरिए साथी किसानों को सशक्त बनाना है।
