देश में वनस्पति तेल का आयात 4.71% घटा, पाम ऑयल गिरा तो सोयाबीन तेल की आवक बढ़ी

सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2026 के दौरान भारत का कुल वनस्पति तेल आयात सालाना आधार पर 4.71 प्रतिशत घटकर 16.09 लाख टन रह गया है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में यह आयात 16.94 लाख टन दर्ज किया गया था। वैश्विक कीमतों में आई तेजी और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में आई कमजोरी को आयात लागत बढ़ने का मुख्य कारण माना जा रहा है, जिससे विशेष रूप से पाम तेल की अंतरराष्ट्रीय खरीद प्रभावित हुई है।

पाम तेल और सूरजमुखी तेल के आयात में गिरावट, सोयाबीन तेल में भारी उछाल

कच्चे पाम तेल का आयात अगस्त में घटकर 7.60 लाख टन रह गया, जो एक साल पहले 9.79 लाख टन था। इसी प्रकार सूरजमुखी तेल का आयात भी 2.57 लाख टन से घटकर 1.55 लाख टन पर आ गया। इसके विपरीत, सोयाबीन तेल के आयात में तेजी देखी गई और यह पिछले साल के 3.87 लाख टन से बढ़कर 5.54 लाख टन के स्तर पर पहुंच गया। अगस्त में कुल खाद्य तेल का आयात 15.72 लाख टन तथा गैर-खाद्य वनस्पति तेल का आयात 37,150 टन रहा।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी: कच्चा पाम तेल 1,259 डॉलर प्रति टन पर पहुंचा

मूल्य सूचकांक के अनुसार, अगस्त महीने में भारतीय बंदरगाहों पर कच्चे पाम तेल की औसत लागत, बीमा और भाड़ा (सीआईएफ) कीमत 1,259 डॉलर प्रति टन रही, जो पिछले साल की तुलना में 9 प्रतिशत अधिक है। इसके अलावा आरबीडी पामोलिन की कीमत में 10 प्रतिशत, सोयाबीन तेल में 8 प्रतिशत और सूरजमुखी तेल की दरों में 18 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

डॉलर के मुकाबले कमजोर रुपया: आयातकों और रिफाइनरों के लिए बढ़ी लाग

एसोसिएशन के अनुसार, पिछले एक वर्ष के दौरान भारतीय रुपये में 9 प्रतिशत से अधिक की आई गिरावट आयातकों और रिफाइनरों के लिए गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है, क्योंकि इससे घरेलू बाजार के लिए कच्चे माल की लागत लगातार बढ़ रही है।

निष्कर्ष: अगस्त में वनस्पति तेल आयात में 4.71 प्रतिशत की गिरावट यह दर्शाती है कि वैश्विक कमोडिटी मूल्य और मुद्रा विनिमय दर सीधे तौर पर भारत की आयात रणनीति को संचालित करते हैं। महंगे पाम तेल के स्थान पर सोयाबीन तेल की मांग बढ़ना भारतीय रिफाइनरों के तात्कालिक अनुकूलन को दिखाता है।

घरेलू स्तर पर आयात लागत का बढ़ना उपभोक्ताओं के लिए भले ही खाद्य तेलों की खुदरा कीमतों में स्थिरता का दबाव बनाए रखे, परंतु आगामी खरीफ कटाई सत्र में यह स्थिति देश के सोयाबीन किसानों को मंडियों में उचित और लाभकारी मूल्य दिलाने में सहायक सिद्ध हो सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1. अगस्त में भारत का कुल वनस्पति तेल आयात कितना रहा?

उत्तर: सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) के अनुसार, अगस्त में कुल वनस्पति तेल आयात 4.71 प्रतिशत घटकर 16.09 लाख टन रहा।

Q2. पाम तेल के आयात में गिरावट और सोयाबीन तेल में उछाल क्यों आया?

उत्तर: अंतरराष्ट्रीय बाजार में पाम तेल की कीमतों में तेजी और रुपये की कमजोरी के कारण रिफाइनरों ने पाम तेल के बजाय सोयाबीन तेल की खरीद को प्राथमिकता दी।

Q3. भारतीय बंदरगाहों पर कच्चे पाम तेल (CPO) का भाव क्या रहा?

उत्तर: अगस्त महीने में कच्चे पाम तेल की औसत सीआईएफ (CIF) कीमत 1,259 डॉलर प्रति टन रही, जो पिछले साल से 9 प्रतिशत अधिक है।

Q4. रुपये में गिरावट का खाद्य तेल आयात पर क्या असर पड़ा?

उत्तर: डॉलर के मुकाबले रुपये में लगभग 9 प्रतिशत की गिरावट से आयातकों के लिए कच्चा माल मंगाना काफी महंगा हो गया है, जिससे आयात की गति धीमी हुई।

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