रबी सीजन में तिलहनी फसलों की रानी मानी जाने वाली राई-सरसों से भरपूर पैदावार और दानों में उच्च तेल प्रतिशत प्राप्त करने के लिए केवल अंधाधुंध यूरिया या डीएपी झोंकना पर्याप्त नहीं है। पौधों के 17 आवश्यक पोषक तत्वों में से प्रमुख नत्रजन, फास्फोरस, पोटाश के साथ-साथ गंधक (सल्फर) का संतुलित प्रयोग ही बंपर मुनाफे की वास्तविक कुंजी है।
सिंचित व बारानी क्षेत्रों के लिए प्रति एकड़ सटीक पोषण दरें, जिंक-बोरॉन का प्रबंधन और बुवाई के समय बीज को उर्वरक के सीधे संपर्क से बचाकर 2 इंच गहराई पर खाद डालने की संपूर्ण वैज्ञानिक विधि।
संतुलित पोषण और 17 पोषक तत्व
राई-सरसों की फसल से अच्छी और गुणवत्तापूर्ण उपज प्राप्त करने के लिए संतुलित पोषण प्रबंधन बहुत जरूरी है। पौधों को अपना जीवन चक्र पूरा करने, स्वस्थ वृद्धि करने, फूल-फलियां बनने और अच्छी उपज देने के लिए 17 आवश्यक पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है।
इनमें से किसी एक पोषक तत्व की कमी होने पर पौधा अपनी पूरी क्षमता के अनुसार वृद्धि और उत्पादन नहीं कर पाता। राई-सरसों में नत्रजन, फास्फोरस, पोटाश और गंधक प्रमुख पोषक तत्व हैं। इनके अलावा जिंक, बोरॉन और लोहा जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व भी आवश्यकता के अनुसार महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
ज्यादा उर्वरक उपज की गारंटी नहीं
पोषक तत्वों की आवश्यकता पूरी करने के लिए उर्वरकों का प्रयोग किया जाता है। लेकिन केवल अधिक मात्रा में उर्वरक डालना ही अच्छी उपज की गारंटी नहीं है। मृदा परीक्षण के आधार पर सही पोषक तत्व, सही मात्रा, सही समय और सही विधि से देना ही संतुलित उर्वरक प्रबंधन है।
नत्रजन, फास्फोरस और पोटाश प्रबंधन
नत्रजन: नत्रजन पौधों की हरी वृद्धि, पत्तियों के विकास, शाखाओं की संख्या और उपज बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। राई-सरसों की फसल में इसकी आवश्यकता अपेक्षाकृत अधिक होती है। सिंचित सरसों में विभिन्न क्षेत्रों और परिस्थितियों के अनुसार सामान्यतः 30-35 किग्रा नत्रजन प्रति एकड़ तक की आवश्यकता हो सकती है।
अनेक क्षेत्रों में 25-30 किग्रा नत्रजन प्रति एकड़ की अनुशंसा की जाती है। नत्रजन पानी में आसानी से घुल जाता है और खेत में लंबे समय तक स्थिर नहीं रहता। इसलिए इसकी पूरी मात्रा एक साथ देने के बजाय दो भागों में देना अधिक प्रभावी होता है। आधी मात्रा बुवाई के समय दें। शेष आधी मात्रा पहली सिंचाई के बाद टॉप ड्रेसिंग के रूप में दें।
फास्फोरस: फास्फोरस पौधों की जड़ों के विकास, ऊर्जा संचरण, फूल आने और फलियों और बीज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। राई-सरसों में सामान्यतः 10-15 किग्रा फास्फोरस प्रति एकड़ की अनुशंसा की जाती है। हालांकि, वास्तविक आवश्यकता मृदा परीक्षण और स्थानीय अनुशंसा पर निर्भर करती है। फास्फोरस मिट्टी में अपेक्षाकृत कम गतिशील होता है। इसलिए इसे बुवाई के समय देना अधिक उपयोगी होता है।
पोटाश: पोटाश पौधों की मजबूती, जल उपयोग दक्षता और प्रतिकूल परिस्थितियों को सहन करने की क्षमता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। राई-सरसों में सामान्यतः 7-10 किग्रा पोटाश प्रति एकड़ मात्रा की अनुशंसा की जाती है। पोटाश की आवश्यकता और मात्रा खेत की मिट्टी-मृदा परीक्षण के परिणाम के आधार पर निर्धारित करना बेहतर है।
गंधक का महत्व और तेल प्रतिशत
गंधक (सल्फर): राई-सरसों तिलहनी फसल है और इसमें गंधक (सल्फर) का विशेष महत्व है। गंधक पौधों में प्रोटीन निर्माण और तेल की मात्रा से संबंधित महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में भूमिका निभाता है। सरसों में सामान्यतः 7-10 किग्रा गंधक प्रति एकड़ की आवश्यकता बताई जाती है।
गंधक की पूर्ति के लिए ऐसे उर्वरकों का उपयोग किया जा सकता है जिनमें गंधक उपलब्ध हो। जैसे, जिप्सम, सिंगल सुपर फॉस्फेट, अमोनियम सल्फेट। गंधकयुक्त उर्वरकों का प्रयोग बुवाई से पूर्व अथवा बुवाई के समय स्थानीय अनुशंसा के अनुसार करना लाभकारी होता है।
सूक्ष्म पोषक तत्वों का प्रबंधन
केवल नत्रजन, फास्फोरस, पोटाश और गंधक देने से ही हर खेत में पूरी पोषण आवश्यकता पूरी नहीं होती। कुछ क्षेत्रों में सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी भी फसल की उपज को प्रभावित कर सकती है।
इसलिए मृदा परीक्षण के आधार पर सूक्ष्म पोषक तत्वों का प्रबंधन करना चाहिए। जिन क्षेत्रों में बोरॉन की कमी पाई जाती है, वहाँ 3 से 4 किग्रा बोरेक्स प्रति एकड़ की दर से बुवाई से पहले खेत में अच्छी तरह मिलाने की अनुशंसा की गई है। जिंक की कमी वाली मिट्टी में 7 से 10 किग्रा जिंक सल्फेट प्रति हेक्टेयर की दर से बुवाई से पहले खेत में अच्छी तरह मिलाया जा सकता है।
क्षारीय मिट्टी में पौधों को लोहे की उपलब्धता कम हो सकती है। ऐसी स्थिति में 5 से 7 किग्रा फेरस सल्फेट प्रति एकड़ की दर से बुवाई से पूर्व खेत में मिलाने की अनुशंसा की गई है। सूक्ष्म पोषक तत्वों का प्रयोग आवश्यकता और मृदा परीक्षण के आधार पर ही करें। बिना कमी की पुष्टि के लगातार सूक्ष्म पोषक तत्व डालना आवश्यक नहीं है।
बारानी सरसों में पोषक तत्व प्रबंधन
बरानी अथवा असिंचित क्षेत्र में सिंचाई की उपलब्धता सीमित होने के कारण फसल की पोषक तत्व आवश्यकता सिंचित फसल की तुलना में लगभग आधी हो सकती है। बारानी फसल में उपलब्ध नमी को ध्यान में रखते हुए सभी अनुशंसित पोषक तत्वों की पूरी मात्रा बुवाई के समय देना अधिक उपयुक्त माना गया है।
उर्वरक बीज से कितनी दूरी पर डालें
किसान भाइयों, उर्वरक प्रबंधन में केवल मात्रा ही नहीं, बल्कि उर्वरक डालने की सही जगह और गहराई भी बहुत महत्वपूर्ण है। उर्वरकों को बीज के सीधे संपर्क में नहीं आने देना चाहिए। बीज के सीधे संपर्क में अधिक मात्रा में उर्वरक आने से अंकुरण प्रभावित हो सकता है। इसलिए उर्वरकों को बीज से कम से कम लगभग 2 इंच नीचे अथवा अलग स्थान पर देने की सलाह दी जाती है। ताकि, जड़ों को पोषक तत्व आसानी से उपलब्ध हो सकें और बीज सुरक्षित रहे।
सरसों में खाद डालते समय किसान कभी न करें ये 3 गलतियां
यूरिया (नत्रजन) की पूरी मात्रा एक साथ डालना: नत्रजन पानी में बेहद घुलनशील होता है। यदि पूरी यूरिया बुवाई पर डाल दी जाए, तो वह लीचिंग होकर बह जाती है। हमेशा आधी मात्रा बुवाई पर और आधी पहली सिंचाई के बाद ही दें।
सल्फर (गंधक) की अनदेखी करना: सरसों एक तिलहनी फसल है। बिना सल्फर के दानों का आकार छोटा रह जाता है और तेल की मात्रा 2 से 4% तक घट जाती है। इसके लिए सिंगल सुपर फॉस्फेट (SSP) सबसे उत्तम स्रोत है।
बीज और खाद को एक ही नाली में मिलाना: बीज और रासायनिक उर्वरक को कभी मिलाकर न बोएं। उर्वरक की उच्च सांद्रता बीज की नमी खींचकर अंकुरण को जला देती है। उर्वरक हमेशा बीज से 2 इंच नीचे रहना चाहिए।
निष्कर्ष: राई-सरसों की खेती में अधिक खाद डालना कभी भी बंपर पैदावार की गारंटी नहीं होता, बल्कि सही समय पर सही पोषक तत्वों का वैज्ञानिक संतुलन ही असली मुनाफा दिलाता है। नत्रजन को दो चरणों में बांटकर देना, फास्फोरस के साथ सल्फर का अनिवार्य प्रयोग और बीजों को रासायनिक उर्वरक से 2 इंच ऊपर रखना वे बुनियादी तकनीकें हैं, जो शुरुआती अंकुरण से लेकर पकने तक फसल को ताकतवर बनाए रखती हैं।
किसान भाई बुवाई से पहले अपनी मिट्टी की जांच अवश्य कराएं और संतुलित पोषण प्रबंधन अपनाकर तेल और दाना दोनों का रिकॉर्ड उत्पादन सुनिश्चित करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1. राई-सरसों में नत्रजन (यूरिया) देने का सबसे सही समय क्या है?
उत्तर: सिंचित सरसों में 25-35 किग्रा नत्रजन प्रति एकड़ की आवश्यकता होती है। इसकी आधी मात्रा बुवाई के समय बेसल डोज के रूप में दें और शेष आधी मात्रा पहली सिंचाई के बाद टॉप ड्रेसिंग के रूप में दें।
Q2. सरसों की फसल में गंधक (सल्फर) डालना क्यों अनिवार्य है?
उत्तर: सरसों तिलहनी फसल है; सल्फर पौधों में प्रोटीन निर्माण और दानों में तेल प्रतिशत (Oil Content) बढ़ाने के लिए अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए प्रति एकड़ 7-10 किग्रा गंधक देना चाहिए।
Q3. बुवाई के समय खाद को बीज से 2 इंच नीचे डालने की सलाह क्यों दी जाती है?
उत्तर: रासायनिक उर्वरक बीज के सीधे संपर्क में आने पर बीजों के अंकुरण को जला सकते हैं। खाद को 2 इंच नीचे रखने से अंकुरण सुरक्षित रहता है और बढ़ती जड़ों को तुरंत खुराक मिलती है।
Q4. बारानी (असिंचित) सरसों में उर्वरक प्रबंधन कैसे करें?
उत्तर: बारानी क्षेत्र में नमी सीमित होने के कारण उर्वरक की मात्रा सिंचित के मुकाबले लगभग आधी रखी जाती है, और सभी पोषक तत्वों की पूरी मात्रा बुवाई के समय ही एक साथ दी जाती है।
Q5. सरसों में बोरॉन और जिंक की कमी होने पर क्या करें?
उत्तर: बोरॉन की कमी वाले क्षेत्रों में बुवाई से पहले 3-4 किग्रा बोरेक्स प्रति एकड़ और जिंक की कमी में 7-10 किग्रा जिंक सल्फेट प्रति हेक्टेयर मिट्टी में मिलाना चाहिए।
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