आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के मुताबिक, भारत के एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम ने अगस्त 2025 तक 1.44 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा बचत की है और लगभग 245 लाख टन कच्चे तेल के आयात की भरपाई की है। सरकार के ई20 लक्ष्य की दिशा में बढ़ते कदमों ने ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती दी है, लेकिन इसके साथ कृषि ढांचे में बदलाव भी तेज हुआ है।
रिपोर्ट के अनुसार, पारंपरिक गन्ना आधारित स्रोतों के अलावा मक्का अब एथेनॉल उत्पादन का प्रमुख कच्चा माल बनकर उभरा है। वित्त वर्ष 2016 से 2025 के बीच मक्का की उत्पादकता 48 प्रतिशत बढ़कर 3.78 टन प्रति हेक्टेयर हो गई। इसी अवधि में मक्का-आधारित एथेनॉल की कीमतों में औसतन 11.7 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई, जो अन्य स्रोतों से अधिक रही। इसका सीधा असर उत्पादन और रकबे पर दिखा, जहां मक्का का उत्पादन 8.77 प्रतिशत और क्षेत्रफल 6.68 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ा।
आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, इथेनॉल की बढ़ती डिमांड ने मक्के की खेती को जबरदस्त रफ्तार दी है। अब किसानों को न केवल बेहतर MSP मिल रही है, बल्कि डिस्टिलरीज के रूप में एक पक्का खरीदार भी मिल गया है। इससे मक्का उत्पादन में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।
इसके उलट सोयाबीन, सूरजमुखी, सरसों, मूंगफली और मोटे अनाजों की उत्पादकता स्थिर रही या घटती दिखी। कई राज्यों, विशेषकर महाराष्ट्र और कर्नाटक में, मक्का दलहनों, तिलहनों और कपास जैसी फसलों के साथ भूमि के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहा है। सर्वेक्षण ने यह भी रेखांकित किया कि पानी की अधिक खपत वाली धान से मक्का की ओर अपेक्षित शिफ्ट नहीं हो सका है। इससे फसल विविधीकरण, पोषण संतुलन और खाद्य सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं उभर रही हैं।
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