अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारत के कृषि निर्यात पर भी दिखाई देने लगा है। पश्चिम एशिया के कुछ हिस्सों में हवाई यातायात प्रभावित होने से खाड़ी देशों को फल और सब्जियों की आपूर्ति बाधित हो गई है।
निर्यातकों के अनुसार, उड़ान मार्गों को लेकर अनिश्चितता के कारण संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरेबिया, कुवैत, क़तर और इजरायल जैसे प्रमुख बाजारों के लिए खेप लगभग ठप हो गई है। कार्गो शेड्यूल बाधित होने से माल गोदामों में अटक रहा है, जिससे खराब होने और वित्तीय नुकसान का जोखिम बढ़ गया है।
पिछले वित्त वर्ष में भारत ने खाड़ी देशों को करीब 2,008 करोड़ रुपये के कृषि उत्पाद निर्यात किए थे। चालू वर्ष में व्यापार सामान्य गति से चल रहा था, लेकिन अचानक उभरे तनाव ने लॉजिस्टिक्स शृंखला को झटका दिया है। विशेष रूप से आगामी आम सीजन को लेकर चिंता गहराई है, क्योंकि इसका बड़ा हिस्सा हवाई माल ढुलाई पर निर्भर रहता है।
हालांकि, समुद्री मार्ग उपलब्ध हैं, पर लंबी ट्रांजिट अवधि अत्यधिक नाशवंत उत्पादों के लिए व्यावहारिक नहीं मानी जाती। उद्योग संगठनों ने केंद्र सरकार से वैकल्पिक हवाई गलियारों की पहचान या विशेष कार्गो उड़ानों की व्यवस्था करने का आग्रह किया है।
निर्यातक संगठनों का कहना है कि यदि स्थिति लंबी खिंची तो बिना निर्यात हुआ माल घरेलू मंडियों में पहुंचेगा, जिससे कीमतों पर दबाव बनेगा और बागवानी किसानों की आय प्रभावित हो सकती है। फिलहाल क्षेत्र की निगाहें घटनाक्रम और संभावित नीतिगत हस्तक्षेप पर टिकी हैं।
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