हाल ही में एक रिपोर्ट में सामने आया है कि दुनिया में रासायनिक कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग और उससे होने वाले नुकसान के मामले में भारत टॉप देशों में शामिल है। यह स्थिति केवल पर्यावरण के लिए ही नहीं, बल्कि किसानों और उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर चिंता का विषय है। इसलिए अब समय आ गया है कि किसान खेती में सोच-समझकर और संतुलित तरीके से रासायनिक कीटनाशकों का उपयोग करें। आज भारत, चीन, ब्राजील और अमेरिका मिलकर दुनिया में लगभग 70 प्रतिशत कीटनाशकों का उपयोग कर रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, हमारे देश में अभी भी कई ऐसे कीटनाशक उपयोग में हैं जो कई देशों में प्रतिबंधित हो चुके हैं। इसका सबसे बड़ा असर मिट्टी की गुणवत्ता, जल स्रोत और मानव स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। लंबे समय तक इन रसायनों का उपयोग करने से खेत की उर्वरता कम होती है, लाभकारी कीट और सूक्ष्मजीव नष्ट हो जाते हैं और फसल की प्राकृतिक प्रतिरोधक क्षमता भी कमजोर हो जाती है।
किसानों को यह समझना जरूरी है कि हर कीट के लिए कीटनाशक जरूरी नहीं होती। कई बार प्राकृतिक नियंत्रण, फसल चक्र, संतुलित पोषण और जैविक उपायों से भी कीटों को नियंत्रित किया जा सकता है। बिना पहचान के बार-बार कीटनाशक का छिड़काव करना न केवल खर्च बढ़ाता है, बल्कि उत्पादन लागत को भी बढ़ा देता है। इसके अलावा, कीटों में दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता भी विकसित हो जाती है, जिससे भविष्य में दवाएं असर करना बंद कर देती हैं।
इसलिए सबसे पहले खेत का नियमित निरीक्षण करें। यदि कीट आर्थिक हानि स्तर से अधिक हो जाएं तभी कीटनाशक का उपयोग करें। रासायनिक कीटनाशकों का चयन भी विशेषज्ञ या कृषि वैज्ञानिक की सलाह से करें। एक ही रसायन को बार-बार उपयोग करने के बजाय दवाओं को परिवर्तन करें, ताकि प्रतिरोधक क्षमता विकसित न हो।
छिड़काव हमेशा सही मात्रा और सही समय पर करें। इससे दवा का असर बढ़ेगा और खर्च कम होगा। इसके साथ ही, एकीकृत कीट प्रबंधन यानी आईपीएम अपनाना आज की जरूरत है। इसमें जैविक कीटनाशक, गोबर, वार्मी कंपोस्ट, समुद्री शैवाल, माइक्रोराइजा, ट्रैप, प्राकृतिक शत्रु, संतुलित उर्वरक और सही खेती तकनीक शामिल होती है।
इससे पर्यावरण सुरक्षित रहता है और उत्पादन भी स्थिर रहता है। कई किसान अब कम कीटनाशक का उपयोग करके अधिक मुनाफा कमा रहे हैं। सरकार भी कीटनाशक प्रबंधन को लेकर सख्त कानून लाने की तैयारी कर रही है। इसका उद्देश्य किसानों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण उत्पाद उपलब्ध कराना है। इसलिए आने वाले समय में केवल पंजीकृत और सुरक्षित दवाओं का उपयोग ही जरूरी होगा।
खेती में बदलाव का अब समय आ गया है। कम लागत, सुरक्षित खेती और स्वस्थ उत्पादन ही भविष्य की दिशा है। सोच-समझकर रासायनिक कीटनाशकों का उपयोग करें और अपने खेत, परिवार और पर्यावरण को सुरक्षित रखें।
यह भी पढ़े: गेहूं की पैदावार बढ़ाने का ‘सीक्रेट मंत्र’: क्या है झंडा पत्ती और क्यों है यह दानों के लिए जरूरी..!
जागरूक रहिए व नुकसान से बचिए और अन्य लोगों के जागरूकता के लिए साझा करें एवं कृषि जागृति, स्वास्थ्य सामग्री, सरकारी योजनाएं, कृषि तकनीक, व्यवसायिक एवं जैविक खेती से संबंधित जानकारियां प्राप्त करने के लिए जुड़े कृषि जागृति चलो गांव की ओर से या कृषि संबंधित किसी भी समस्या के जैविक समाधान के लिए WhatsApp करें।
