भारत दलहन एवं अनाज संघ आईपीजीए की साप्ताहिक रिपोर्ट के अनुसार कमजोर मांग और पर्याप्त आपूर्ति के कारण निकट अवधि में चना कीमतों पर दबाव बने रहने की संभावना है, जबकि तूर और उड़द के भाव सीमित दायरे में बने रह सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक चना दाल और बेसन की मांग सुस्त बनी हुई है। इसके साथ नई फसल की लगातार आवक और आयात बढ़ने से बाजार धारणा कमजोर हुई है। मिलर फिलहाल आवश्यकता के अनुसार ही खरीद कर रहे हैं।
हालांकि सरकार ने कई राज्यों में खरीद को मंजूरी दी है, लेकिन खरीद शुरू होने में देरी से कीमतों पर दबाव बना हुआ है। आईपीजीए का मानना है कि राजस्थान और मध्य प्रदेश में चरम आवक के दौरान सरकारी खरीद शुरू होने से निचले स्तर पर कीमतों को सहारा मिल सकता है। समाप्त सप्ताह में दिल्ली बाजार में चना कीमतें 125 रुपय प्रति क्विंटल घटकर 5,600 से3 5,625 रुपय प्रति क्विंटल रह गईं।
तूर की कीमतें फिलहाल सीमित दायरे में रहने की संभावना है। भाव करीब 8,000 रुपय प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी के आसपास बने हुए हैं, जिससे किसानों की बिक्री को प्रोत्साहन मिल रहा है। महाराष्ट्र की अकोला मंडी में सप्ताह के दौरान तूर के भाव 200 रुपय घटकर 8,100 से 8,125 रुपय प्रति क्विंटल रह गए। उड़द बाजार में भी मध्यम आपूर्ति और आवश्यकता आधारित मांग के कारण स्थिरता की संभावना है। गर्मियों में उड़द से बने उत्पादों की खपत सामान्यतः कम हो जाती है।
इसके अलावा Myanmar से आयात बढ़ने और नई रबी फसल की आवक भी कीमतों को प्रभावित कर सकती है। चंदौसी मंडी में उड़द के भाव 50 रुपय बढ़कर 7,650 रुपय प्रति क्विंटल हो गए, जबकि गुंटूर में कीमतें 8,275 रुपय प्रति क्विंटल पर स्थिर रहीं। कुल मिलाकर आईपीजीए का आकलन है कि निकट अवधि में चना बाजार दबाव में रह सकता है, जबकि तूर और उड़द के भाव मांग-आपूर्ति संतुलन के बीच अपेक्षाकृत स्थिर बने रहने की संभावना है।
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