गर्मी के मौसम में कद्दू, ककड़ी, तरबूज, खरबूज, खीरे आदि फसलों की मांग बाजार में काफी बढ़ने लगती है। ऐसे में हमारे किसान भाई इन फसलों की जैविक खेती करके अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। यदि आप भी है एक किसान और करना चाहते है कद्दू, ककड़ी, तरबूज, खरबूज या खीरे की जैविक बुआई तो कृषि जागृति के इस पोस्ट में जान सकते है की खेत तैयार करने की जैविक विधि।
खीरे की जैविक बुआई के लिए खेत तैयार करने की जैविक विधि
सबसे पहले हमारे किसान भाई प्रति एक खेत का चयन करे फिर मिट्टी पलटने वाली हल से एक गहरी जुताई करें।
फिर दो से तीन दिन बाद 5 टन 12 माह पुरानी सड़ी हुई गोबर की खाद में एक लीटर जी-बायो फॉस्फेट एडवांस को मिलाकर प्रति एकड़ खेत में बिखेर कर दो बार हल्की जुताई करें। जुताई ऐसी करे जिससे गोबर की खाद मिट्टी में अच्छी तरह मिल जाए और मिट्टी भुरभुरी हो जाए।
फिर बुआई के समय जैविक खाद एवं जैव उर्वरकों का प्रयोग मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों के अनुसार करें। इसके लिए आमतौर पर खीरे की जैविक बुआई करने के लिए प्रति एकड़ खेत में 25 किलोग्राम नाइट्रोजन, 15 किलोग्राम फास्फोरस और 10 किलोग्राम पोटाश की जरूरत पड़ती हैं।
इन पोषक तत्वों कि पूर्ति करने के लिए हमारे किसान भाई 25 किलोग्राम यूरिया और 15 किलोग्राम डीएपी और 10 किलोग्राम जी-सी पावर या 10 किलोग्राम जी-प्रोम एडवांस एवं अलग से 4 किलोग्राम जी-वैम का मिलाकर प्रति एकड़ खेत में बुआई के समय खेत में बिखेर कर मिट्टी में अच्छी तरह मिला दें।
फिर इसके बाद तैयार किए हुए खेत में क्यारियां बनाएं। इन क्यारियों से क्यारियों के बीच की दूरी 2.5 से 3 मीटर की दूरी रखे। फिर 10 मिली जी-बायो फॉस्फेट एडवांस से प्रति किलोग्राम बीज को उपचारित करके संध्या के समय क्यारियों के ऊपर एक-एक मीटर की दूरी पर दो से तीन बीज लगाएं।
जब फसल 20 से 25 दिन की हो जाए तब फसल में 25 किलोग्राम यूरिया और 10 किलोग्राम जी-प्रोम एडवांस और 4 किलोग्राम ग्राम जी-वैम को मिलाकर प्रति एकड़ खेत में लगाएं गए खीरे की पौधों में थाला बना कर डालें। ध्यान रहे खीरे पौधों की जड़ों के आस-पास प्रति पौधा इस मिश्रण को 50 से 100 ग्राम से अधिक नहीं देना हैं और खेत में पर्याप्त मात्रा में नमी बनाए रखें।
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हमें उम्मीद है की कृषि जागृति के इस पोस्ट में बताए गए जैविक तरीके से खेत को तैयार करके किसान उच्च गुणवत्ता की अच्छी पैदावार प्राप्त कर सकेंगे। यदि हमारे किसान भाइयों को यह जानकारी पसंद आई हो तो इस पोस्ट को अन्य किसानों के साथ साझा करें। जिससे अधिक से अधिक किसान इसका लाभ उठा सकें। इससे जुड़े अपने सवाल हमे से WhatsApp के माध्यम से पूछ सकते हैं।