क्या ₹1.75 लाख करोड़ के इस नए महा-पैकेज से किसानों के खेत तक योजनाओं का पैसा बिना फाइलों में अटके सीधे पहुंचेगा या फिर 30 प्रतिशत फंड को राज्यों के परफॉर्मेंस से बांधने का फैसला योजनाओं की रफ्तार धीमी कर देगा? 3 बड़ी योजनाओं के विलय और फंडिंग के बदले नियमों को समझे बिना आने वाले 5 वर्षों की कृषि नीतियों का अनुमान लगाना मुश्किल है।
तीन बड़ी योजनाओं का एकीकरण
केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने अपनी प्रमुख योजना राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के ढांचे को सरल और अधिक परिणामोन्मुख बनाने के लिए इसके तहत चल रही तीन योजनाओं के विलय का प्रस्ताव रखा है। इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित खबर के अनुसार, कृषोन्नति योजना, राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन और राष्ट्रीय मधुमक्खी एवं शहद मिशन को एकीकृत कर अगले पाँच वर्षों के लिए 1.75 लाख करोड़ रुपए का समग्र कार्यक्रम बनाया जाएगा।
16वें वित्त आयोग का फंडिंग ढांचा
यह संयुक्त योजना 16वें वित्त आयोग चक्र के तहत अप्रैल 2026 से मार्च 2031 तक लागू करने का प्रस्ताव है। इसके अंतर्गत अधिकांश राज्यों के लिए केंद्र-राज्य हिस्सेदारी 60:40, पूर्वोत्तर व हिमालयी राज्यों के लिए 90:10 और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 100 प्रतिशत केंद्रीय वित्त पोषण का प्रावधान रहेगा।
30% फंड प्रदर्शन और सुधारों से लिंक
प्रस्ताव का प्रमुख बदलाव फंड आवंटन को प्रदर्शन से जोड़ना है। इसमें 30 प्रतिशत वेटेज राज्यों द्वारा किए गए कृषि सुधारों और हासिल मील के पत्थरों के आकलन को दिया जाएगा, जो मौजूदा मानदंडों जैसे असिंचित क्षेत्र या छोटे किसानों के अनुपात से अलग दृष्टिकोण दर्शाता है। यह मॉडल नीति आयोग की प्रदर्शन-आधारित वित्त पोषण संबंधी सिफारिशों के अनुरूप है।
व्यय वित्त समिति और कैबिनेट मंजूरी
मंत्रालय ने इस प्रस्ताव को व्यय वित्त समिति की मंजूरी के लिए भेज दिया है। स्वीकृति के बाद इसे केंद्रीय मंत्रिमंडल के समक्ष रखा जाएगा। सरकार का उद्देश्य कृषि व्यय में दक्षता, जवाबदेही और सुधारों पर फोकस को मजबूत करना है।
ईज ऑफ डूइंग फार्मिंग की दिशा में कदम
अगर यह प्रस्ताव पूरी तरह लागू होता है, तो राज्यों के पास अपनी कृषि रणनीति बनाने की अधिक आजादी होगी, जिससे अंततः हमारे किसान भाइयों की आय में वृद्धि और खेती की लागत में कमी आएगी। यह ‘डिजिटल एग्रीकल्चर’ और ‘ईज ऑफ डूइंग फार्मिंग’ की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।
नए RKVY प्रस्ताव से जुड़ी 3 सबसे जरूरी बातें
योजनाओं के टकराव और लालफीताशाही का अंत: अब किसानों को बीज, प्राकृतिक खेती और मधुमक्खी पालन के लिए अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे; एक ही खिड़की से सभी सुविधाएं मिलेंगी।
काम करोगे तो मिलेगा 30% अधिक बजट: नीति आयोग के फॉर्मूले के तहत जो राज्य कृषि विपणन और भूमि सुधार लागू करेंगे, केंद्र से उन्हें अतिरिक्त 30% विकास फंड आसानी से मिलेगा।
राज्यों को मिली फसल योजना की पूरी छूट: केंद्र के थोपे गए नियमों के बजाय राज्य अपनी स्थानीय जलवायु और किसानों की जरूरत के मुताबिक बजट खर्च करने के लिए स्वतंत्र होंगे।
निष्कर्ष: राष्ट्रीय कृषि विकास योजना में तीन प्रमुख योजनाओं का विलय कृषि क्षेत्र में प्रशासनिक दक्षता और वित्तीय अनुशासन लाने की दिशा में एक साहसिक सुधार है। 1.75 लाख करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट को राज्यों के प्रदर्शन से जोड़ना निश्चित रूप से योजनाओं को धरातल पर अधिक परिणामोन्मुख बनाएगा। यदि राज्य सरकारें राजनीतिक खींचतान से ऊपर उठकर समयबद्ध कृषि सुधार लागू करती हैं, तो यह व्यवस्था किसानों की लागत घटाने और आय बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होगी।
अस्वीकरण (Disclaimer): यह विश्लेषणात्मक रिपोर्ट Anil Kumar Prasad द्वारा आधिकारिक आंकड़ों, विभिन्न विश्वसनीय समाचार स्रोतों और जमीनी कृषि वास्तविकताओं के निष्पक्ष अध्ययन के आधार पर तैयार की गई है। इसका उद्देश्य नीतिगत निर्णयों और बाजार की स्थिति से किसानों को अवगत कराना है। इस विषय पर अपने क्षेत्र की स्थिति और विचार जरूर साझा करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1. राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) में किन तीन योजनाओं का विलय किया जा रहा है?
उत्तर: प्रस्ताव के तहत कृषोन्नति योजना, राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन और राष्ट्रीय मधुमक्खी एवं शहद मिशन को आरकेवीवाई में एकीकृत किया जा रहा है।
Q2. इस पुनर्गठित योजना का कुल प्रस्तावित बजट कितना है?
उत्तर: 16वें वित्त आयोग चक्र (अप्रैल 2026 से मार्च 2031) के तहत अगले 5 वर्षों के लिए कुल ₹1.75 लाख करोड़ का समग्र कार्यक्रम प्रस्तावित है।
Q3. केंद्र और राज्यों के बीच फंडिंग का क्या अनुपात तय किया गया है?
उत्तर: अधिकांश सामान्य राज्यों के लिए केंद्र-राज्य हिस्सेदारी 60:40, पूर्वोत्तर व हिमालयी राज्यों के लिए 90:10 और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 100 प्रतिशत केंद्रीय वित्त पोषण रहेगा।
Q4. फंड आवंटन में 30 प्रतिशत परफॉर्मेंस वेटेज का क्या अर्थ है?
उत्तर: इसका अर्थ है कि 30% बजट उन राज्यों को उनके द्वारा किए गए कृषि सुधारों, नीतिगत प्रगति और तय लक्ष्यों को समय पर हासिल करने के प्रदर्शन के आधार पर दिया जाएगा।
Q5. क्या यह प्रस्ताव पूरी तरह लागू हो चुका है?
उत्तर: वर्तमान में कृषि मंत्रालय ने इसे व्यय वित्त समिति (EFC) की मंजूरी के लिए भेजा है; इसके बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल (कैबिनेट) की अंतिम स्वीकृति मिलने पर यह लागू होगा।
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