आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में कृषि क्षेत्र की प्रगति और चुनौतियों दोनों का संतुलित आकलन प्रस्तुत किया गया है। सर्वेक्षण के अनुसार, वर्ष 2024-25 में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत 4.19 करोड़ से अधिक किसानों को प्राकृतिक आपदाओं, कीट प्रकोप और प्रतिकूल मौसम से फसलों की सुरक्षा प्रदान की गई।
वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर 3.5 प्रतिशत रही, जबकि संबद्ध क्षेत्रों ने इससे बेहतर प्रदर्शन किया। पशुपालन क्षेत्र में 7.1 प्रतिशत और मत्स्य क्षेत्र में 8.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो ग्रामीण आय में विविधीकरण की दिशा में सकारात्मक संकेत माने जा रहे हैं।
हालांकि, सर्वेक्षण ने कृषि के सामने बनी संरचनात्मक चुनौतियों को भी रेखांकित किया है। घटती जोत का आकार, मिट्टी की गिरती गुणवत्ता, जल संकट और जलवायु परिवर्तन प्रमुख बाधाएं बनी हुई हैं। अनियमित मौसम, सीमित सिंचाई और गुणवत्तापूर्ण बीजों की उपलब्धता की कमी के कारण मक्का, सोयाबीन और दलहन जैसी फसलों की उत्पादकता अभी भी वैश्विक औसत से नीचे है।
इन चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार द्वारा उच्च उत्पादकता बीज मिशन, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन कार्यक्रम, उर्वरक सुधार, न्यूनतम समर्थन मूल्य संचालन और कृषि विपणन सुधारों पर जोर दिया जा रहा है। बीज एवं रोपण सामग्री उप-मिशन के तहत अब तक 6.85 लाख बीज ग्राम स्थापित किए गए हैं, जिससे 2.5 करोड़ से अधिक किसानों को लाभ मिला है।
सर्वेक्षण में डिजिटल कृषि के विस्तार को भी अहम बताया गया है। e-NAM मंच पर 1.79 करोड़ से अधिक किसान और 10,000 से ज्यादा किसान उत्पादक संगठन पंजीकृत हैं। वहीं, डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के तहत एग्रीस्टैक और निर्णय सहायता प्रणालियों के विस्तार के माध्यम से पारदर्शिता, उत्पादकता और जलवायु-अनुकूल कृषि को बढ़ावा देने की दिशा में काम किया जा रहा है।
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