चालू रबी सीजन में बुवाई ने नई ऊंचाई छू ली है। कृषि मंत्रालय के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक 23 जनवरी तक देश में रबी फसलों का कुल रकबा बढ़कर 660.48 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि के 642.24 लाख हेक्टेयर की तुलना में 18.24 लाख हेक्टेयर अधिक है। गेहूं की बुवाई में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
गेहूं का रकबा पिछले साल के मुकाबले 6.13 लाख हेक्टेयर बढ़कर 334.17 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है। दलहनों का क्षेत्रफल भी मजबूत बढ़त के साथ 137.55 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष से 3.61 लाख हेक्टेयर अधिक है। ज्वार, बाजरा जैसे मोटे अनाजों का रकबा 3.25 लाख हेक्टेयर बढ़कर 60.7 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया है।
तिलहनों की बुवाई में भी सकारात्मक रुझान दिखा है और इसका क्षेत्रफल 3.45 लाख हेक्टेयर की वृद्धि के साथ 97.03 लाख हेक्टेयर हो गया है। आखिर ये मुमकिन कैसे हुआ? इसके पीछे समय पर मानसून की विदाई से मिली नमी, सरकार द्वारा खाद की उपलब्धता और बेहतर न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी का भरोसा है। हमारे किसानों की मेहनत ने खेतों को सोना उगलने पर मजबूर कर दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वर्षा आधारित क्षेत्रों में बेहतर मानसूनी वर्षा और अनुकूल मौसम परिस्थितियों ने रबी बुवाई को गति दी है। अधिक रकबा आने वाले महीनों में उत्पादन बढ़ाने, किसानों की आय को सहारा देने और खाद्य महंगाई को नियंत्रित रखने में अहम भूमिका निभा सकता है।
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