भारत का चीनी क्षेत्र अगले सीजन (2026-27) में एक मजबूत और शानदार वापसी के लिए तैयार नजर आ रहा है। अमेरिकी कृषि विभाग के नई दिल्ली कार्यालय द्वारा जारी ताजा आकलन के मुताबिक, देश में चीनी का कुल उत्पादन बढ़कर 336 लाख टन तक पहुंच सकता है। इस बड़ी बढ़त के पीछे साल 2024 और 2025 के दौरान हुए अनुकूल मानसून को सबसे प्रमुख कारण माना जा रहा है।
बेहतर मानसून की वजह से महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक जैसे बड़े गन्ना उत्पादक राज्यों में भूजल स्तर में काफी सुधार हुआ है। इसका सीधा असर खेती पर पड़ेगा और गन्ने का रकबा बढ़कर 59.5 लाख हेक्टेयर तक पहुंचने का अनुमान है। रिपोर्ट के अनुसार, अगले सीजन में चीनी मिलों द्वारा कुल 4,630 लाख टन गन्ने की पेराई की जा सकती है, जो उद्योग के लिए एक उत्साहजनक संकेत है।
उत्पादन बढ़ने का एक और तकनीकी कारण चीनी की रिकवरी रेट में होने वाला सुधार है। अनुमान है कि 2026-27 के सीजन में गन्ने से चीनी निकलने की दर (रिकवरी रेट) बढ़कर 9.2% हो जाएगी। यह मौजूदा सीजन के 8.3% के मुकाबले काफी बेहतर है। बेहतर रिकवरी का मतलब है कि कम गन्ने में अधिक चीनी का उत्पादन संभव हो सकेगा, जिससे मिलों की कार्यक्षमता बढ़ेगी।
देश में चीनी की घरेलू खपत लगभग 310 लाख टन रहने का अनुमान है। उत्पादन और खपत के इन आंकड़ों के आधार पर बाजार में करीब 26 लाख टन चीनी का अतिरिक्त स्टॉक (अधिशेष) उपलब्ध हो सकता है। यह अधिशेष स्टॉक न केवल घरेलू कीमतों को स्थिर रखेगा, बल्कि निर्यात की संभावनाओं के लिए भी रास्ते खोल सकता है।
हालांकि, मौजूदा सीजन (2025-26) में चीनी उद्योग को कुछ बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। अगस्त से अक्टूबर 2025 के बीच महाराष्ट्र और कर्नाटक में हुई अत्यधिक बारिश ने गन्ने की फसल को काफी नुकसान पहुँचाया था। इसी वजह से शुरुआती उत्पादन अनुमान को 352 लाख टन से घटाकर करीब 300 लाख टन करना पड़ा, जिससे बाजार में थोड़ी चिंता बढ़ गई थी।
भारतीय चीनी एवं जैव-ऊर्जा निर्माता संघ (इस्मा) के ताजा आंकड़े भी मौजूदा सीजन की सुस्ती की पुष्टि करते हैं। अप्रैल की शुरुआत तक देश में चीनी उत्पादन लगभग 272 लाख टन ही रहा है, जो शुरुआती अनुमानों से करीब 12% कम है। लेकिन अगले साल के लिए मिल रहे सकारात्मक संकेतों ने उद्योग की उम्मीदों को फिर से जगा दिया है।
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