केंद्रीय कृषि मंत्रालय द्वारा जारी तीसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार, जून 2026 में समाप्त होने वाले 2025-26 फसल वर्ष में देश का कुल खाद्यान्न उत्पादन 5 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड 3765.6 लाख टन रहने का अनुमान है। इस ऐतिहासिक वृद्धि का सबसे बड़ा श्रेय धान, गेहूं और मक्का की अब तक की सबसे अधिक पैदावार को जाता है, जिसने देश के अन्न भंडार को भरने में मुख्य भूमिका निभाई है।
उत्पादन में इस उछाल के पीछे समय पर हुई मानसूनी बारिश और सरकार द्वारा फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में की गई बढ़ोतरी जैसे बड़े कारक रहे हैं। बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि की चुनौतियों के बावजूद गेहूं का उत्पादन 1206.5 लाख टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने का अनुमान है, जो पिछले साल के मुकाबले 2.3 प्रतिशत अधिक है।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि स्थानीय स्तर पर मौसम की मार के बावजूद गेहूं की फसल का कुल प्रदर्शन बेहद स्थिर और मजबूत बना रहा है। धान के मामले में भी देश ने नई ऊंचाइयों को छुआ है और इसका उत्पादन 1540.2 लाख टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने की संभावना है। वहीं मोटे और पोषक अनाजों के उत्पादन में भी जोरदार तेजी देखी गई है, जो पिछले वर्ष के 639.2 लाख टन से बढ़कर अब 744.7 लाख टन के स्तर पर आ गया है।
इस श्रेणी में मक्का ने जबरदस्त प्रदर्शन किया है और इसका उत्पादन एक साल पहले के 434 लाख टन के मुकाबले अब रिकॉर्ड 550.9 लाख टन रहने का अनुमान लगाया गया है। दलहन और तिलहन फसलों के आंकड़ों में भी मिला-जुला लेकिन सकारात्मक रुझान देखने को मिला है।
चने का उत्पादन 111.1 लाख टन से उछलकर 125.1 लाख टन पर पहुंचने की उम्मीद है, जबकि अरहर और मसूर का उत्पादन लगभग स्थिर बना हुआ है। तिलहन के क्षेत्र में सरसों और मूंगफली की अच्छी पैदावार से कुल उत्पादन 430.5 लाख टन तक पहुंच सकता है। हालांकि, सोयाबीन के उत्पादन में इस बार थोड़ी गिरावट की आशंका है और यह पिछले साल के 152.6 लाख टन से घटकर 125.9 लाख टन रह सकता है।
निष्कर्ष: केंद्रीय कृषि मंत्रालय के तीसरे अग्रिम अनुमानों के अनुसार, फसल वर्ष 2025-26 में भारत का कुल खाद्यान्न उत्पादन 5 प्रतिशत की शानदार बढ़ोतरी के साथ 3765.6 लाख टन के ऐतिहासिक रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने का अनुमान है। समय पर हुई मानसूनी बारिश और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में वृद्धि के चलते धान, गेहूं और विशेषकर मक्का की रिकॉर्ड पैदावार ने इस सफलता में मुख्य भूमिका निभाई है।
हालांकि, बेमौसम बारिश जैसी मौसमी चुनौतियों के कारण सोयाबीन जैसी कुछ फसलों के उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन इसके बावजूद दलहन, तिलहन और मोटे अनाजों के मजबूत प्रदर्शन ने देश की खाद्य सुरक्षा और कृषि क्षेत्र की स्थिरता को एक नई मजबूती प्रदान की है।
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