MP में ‘कृषक कल्याण वर्ष’ या ‘कागजी आश्वासन’? 100% फसल बर्बादी पर केवल 15% का सर्वे

मध्य प्रदेश सरकार ने वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष घोषित किया है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयान कर रही है। हाल ही में सामने आए मामलों से यह सवाल उठना लाजमी है कि क्या वाकई नीतियां किसानों के हित में काम कर रही हैं या सिर्फ कागजों तक सीमित हैं। भिंड जिले में ओलावृष्टि से किसानों की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई।

खुद मंत्री स्तर पर यह स्वीकार किया गया कि नुकसान 100 प्रतिशत तक हुआ है। इसके बावजूद सर्वे रिपोर्ट में मात्र 15 से 25 प्रतिशत नुकसान दिखाया गया। यह अंतर केवल आंकड़ों का नहीं, बल्कि किसानों के अधिकारों और उनके भविष्य से जुड़ा गंभीर सवाल है। यदि वास्तविक नुकसान को कम करके दिखाया जाएगा, तो स्वाभाविक है कि किसानों को मिलने वाला मुआवजा भी प्रभावित होगा।किसानों की समस्या यहीं खत्म नहीं होती।

समय पर खाद और बीज की उपलब्धता, फसल की सरकारी खरीद, न्यूनतम समर्थन मूल्य का सही लाभ, और उपार्जन प्रक्रिया की पारदर्शिता- इन सभी मुद्दों पर लगातार सवाल उठते रहे हैं। किसानों का कहना है कि घोषणाएं तो बड़ी-बड़ी होती हैं, लेकिन क्रियान्वयन में गंभीर कमी दिखाई देती है। ऐसे हालात में कृषक कल्याण वर्ष जैसे नाम पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

किसानों को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस और पारदर्शी व्यवस्था की जरूरत है। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि जहां भी प्राकृतिक आपदा से फसल बर्बाद हुई है, वहां निष्पक्ष सर्वे कराया जाए और किसानों को शीघ्र व पूर्ण मुआवजा दिया जाए। यदि वास्तव में किसानों का कल्याण लक्ष्य है, तो नीतियों और जमीनी हकीकत के बीच की दूरी को कम करना ही सबसे बड़ा कदम होगा।

किसी भी वर्ष को ‘कल्याण वर्ष’ घोषित करना तब तक अर्थहीन है जब तक सरकारी नीतियों और जमीनी क्रियान्वयन के बीच की खाई को पाटा नहीं जाता। भिंड जैसे मामलों में 100% नुकसान के बावजूद सर्वे रिपोर्ट में उसे कम दिखाना न केवल प्रशासनिक विफलता है, बल्कि संकटग्रस्त किसानों के साथ एक बड़ा अन्याय भी है।

किसानों का वास्तविक उत्थान कागजी घोषणाओं से नहीं, बल्कि ओलावृष्टि जैसे संकटों में निष्पक्ष सर्वे, समय पर उचित मुआवजे और खाद-बीज की पारदर्शी आपूर्ति सुनिश्चित करने से होगा। अंततः, सरकार की विश्वसनीयता केवल इस बात पर टिकी है कि वह कितनी संवेदनशीलता के साथ ‘आंकड़ों के खेल’ को खत्म कर अन्नदाता को उसका वास्तविक हक दिला पाती है।

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