गन्ने की फसल पर ‘टॉप बोरर’ का हमला, उत्पादन में 15% गिरावट की आशंका

बढ़ते तापमान और मौसम की लुका-छिपी ने गन्ना किसानों की चिंता बढ़ा दी है। गन्ने की मिठास पर इस बार कीटों का कड़वा साया मंडरा रहा है, विशेष रूप से ‘टॉप बोरर’ जैसे खतरनाक कीट फसल को बर्बाद करने पर तुले हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते फसल की निगरानी नहीं बढ़ाई गई, तो इस सीजन में उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है।

फतेहपुर चौत्रा में आयोजित एक हालिया जागरूकता कार्यक्रम के दौरान कृषि विशेषज्ञों ने गन्ने की फसल पर मंडरा रहे ‘टॉप बोरर’ के खतरे को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। विशेषज्ञों के अनुसार, मई और जून के महीने फसल की सुरक्षा के नजरिए से सबसे ज्यादा संवेदनशील होते हैं।

इसी अवधि में तापमान बढ़ने के साथ ही इस कीट का प्रजनन और हमला काफी तेज हो जाता है, जो पूरी फसल को तबाह करने की क्षमता रखता है। टॉप बोरर गन्ने के तनों में बारीक छेद करके पौधों के भीतर घुस जाता है और उन्हें अंदर ही अंदर खाना शुरू कर देता है। इससे पौधा पोषण की कमी के कारण कमजोर हो जाता है और उसकी बढ़वार पूरी तरह रुक जाती है।

पिछले साल के आंकड़े बताते हैं कि जिन क्षेत्रों में इस कीट का प्रकोप अधिक था, वहां गन्ने के उत्पादन में करीब 15 प्रतिशत तक की बड़ी कमी दर्ज की गई थी, जो किसानों के लिए भारी आर्थिक नुकसान का सबब बना था। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कुलदीप पिलानिया ने बताया कि वर्तमान में ‘टॉप बोरर’ की दूसरी पीढ़ी बहुत तेजी से फैल रही है।

यह खड़ी फसल के लिए एक गंभीर चेतावनी है। उन्होंने किसानों से अपील की है कि वे अपने खेतों का नियमित निरीक्षण करें। यदि गन्ने की ऊपरी पत्तियों पर छोटे छेद या तने के पास भूरे निशान जैसे शुरुआती लक्षण दिखाई दें, तो बिना देरी किए प्रभावी नियंत्रण उपाय अपनाएं।

तापमान में लगातार हो रही वृद्धि और मौसम की अनिश्चितता ने केवल टॉप बोरर ही नहीं, बल्कि जड़ छेदक, ब्लैक बग, थ्रिप्स और टिड्डियों जैसे अन्य कीटों को भी सक्रिय कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मी और नमी का असंतुलन इन कीटों के पनपने के लिए अनुकूल माहौल तैयार करता है।

ऐसे में किसानों को सलाह दी गई है कि वे मिट्टी में पर्याप्त नमी बनाए रखने के लिए समय पर सिंचाई करें और संतुलित उर्वरकों का ही उपयोग करें।गन्ने की फसल को इस संकट से बचाने के लिए कृषि विभाग ने अनुशंसित कीटनाशकों और जैविक नियंत्रण पद्धतियों को अपनाने पर जोर दिया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआती स्तर पर पहचान और सामूहिक प्रयास ही फसल के नुकसान को कम कर सकते हैं। समय पर किया गया उपचार न केवल उत्पादन की गुणवत्ता बनाए रखेगा, बल्कि किसानों की साल भर की मेहनत को भी सुरक्षित रखेगा।

निष्कर्ष: बढ़ते तापमान और मौसम के उतार-चढ़ाव के कारण गन्ने की फसल पर ‘टॉप बोरर’ और अन्य हानिकारक कीटों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है, जिससे इस सीजन में उत्पादन में 15% तक की भारी गिरावट आने की आशंका है।

फतेहपुर चौत्रा में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि मई और जून के संवेदनशील महीनों में कीटों की दूसरी पीढ़ी को रोकने के लिए खेतों की नियमित निगरानी बेहद जरूरी है।

इस संकट से निपटने और किसानों को बड़े आर्थिक नुकसान से बचाने के लिए शुरुआती स्तर पर लक्षणों की पहचान करना, समय पर सिंचाई द्वारा मिट्टी में नमी बनाए रखना और कृषि विभाग द्वारा अनुशंसित कीटनाशकों व जैविक नियंत्रण पद्धतियों को सामूहिक रूप से अपनाना ही एकमात्र प्रभावी समाधान है।

यह भी पढ़े: हरियाणा में पशुओं के इलाज के लिए 1962 टोल-फ्री मोबाइल वेटरनरी सेवा शुरू

जागरूक रहिए व नुकसान से बचिए और अन्य लोगों के जागरूकता के लिए साझा करें। कृषि लेख, सरकारी योजनाएं, कृषि तकनीक, व्यवसायिक एवं जैविक खेती से संबंधित सटीक जानकारियां प्राप्त करने के लिए जुड़े कृषि जागृति चलो गांव की ओर से या कृषि संबंधित किसी भी समस्या के जैविक समाधान के लिए WhatsApp करें।