हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने प्रदेश में मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों की शुरुआत करने के निर्देश दिए हैं। अब पशुपालक टोल-फ्री नंबर 1962 पर कॉल करके सुबह 6 बजे से रात 10 बजे के बीच अपने घर पर ही विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं प्राप्त कर सकेंगे। सरकार ने दावा किया है कि कॉल मिलने के मात्र 30 मिनट के भीतर मोबाइल वैन लाभार्थी के पास पहुँच जाएगी।
मुख्यमंत्री ने इस सुविधा को भविष्य में 24 घंटे की आपातकालीन सेवा में बदलने का लक्ष्य भी रखा है ताकि पशुओं को समय पर इलाज मिल सके। कृषि विभाग ने भूमि सुधार और जल संरक्षण के लिए एक बेहद महत्वाकांक्षी लक्ष्य प्रस्तुत किया है।
विभाग का उद्देश्य वर्ष 2026-27 तक लगभग 1.40 लाख एकड़ जलभराव वाली और लवणीय भूमि को खेती के लायक बनाना है, जिसे वर्ष 2031 तक बढ़ाकर 100 प्रतिशत सुधारने का लक्ष्य है। इसके अतिरिक्त, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के लिए हर साल 15 लाख किसानों को ‘सॉइल हेल्थ कार्ड’ जारी किए जाएंगे।
सरकार का जोर अब टिकाऊ खेती पर है, जिसके तहत 1.5 लाख एकड़ भूमि को प्राकृतिक और जैविक खेती समूहों में बदला जाएगा। राज्य में गिरते भूजल स्तर को देखते हुए ‘डायरेक्ट सीडेड राइस’ यानी धान की सीधी बिजाई तकनीक को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दिया जा रहा है।
हरियाणा सरकार ने इस तकनीक के तहत 3 लाख एकड़ भूमि को लाने का लक्ष्य रखा है, जिससे पानी की भारी बचत होगी। साथ ही, पराली जलाने की समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए हर साल किसानों को 15,000 फसल अवशेष प्रबंधन मशीनें वितरित की जाएंगी। सरकार का संकल्प है कि आधुनिक मशीनीकरण के जरिए पराली जलाने की घटनाओं को शून्य स्तर पर लाया जाए।
मुख्यमंत्री ने इन सभी योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए एक विशेष ‘जागरूक यात्रा’ शुरू करने के निर्देश दिए हैं। इस यात्रा के माध्यम से किसानों को रसायनों के उपयोग को कम करने, फसल विविधीकरण अपनाने और पराली न जलाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
जागरूकता अभियान को प्रभावी बनाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म, व्हाट्सएप और डॉक्युमेंट्री फिल्मों का सहारा लिया जाएगा। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि राज्य का हर किसान इन आधुनिक तकनीकों और सरकारी लाभों से पूरी तरह परिचित हो।
निष्कर्ष: हरियाणा सरकार द्वारा मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में शुरू की गई ये योजनाएं राज्य में कृषि और पशुपालन के क्षेत्र में एक बड़े सकारात्मक बदलाव का संकेत देती हैं।
1962 टोल-फ्री पशु चिकित्सा सेवा जहां पशुपालकों को घर बैठे त्वरित और विशेषज्ञ चिकित्सा राहत देगी, वहीं दूसरी ओर जलभराव व लवणीय भूमि में सुधार, धान की सीधी बिजाई (DSR) तकनीक, और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने जैसे कदम गिरते भूजल स्तर और मिट्टी की उर्वरता की गंभीर समस्याओं से निपटने में बेहद कारगर साबित होंगे।
इसके साथ ही, किसानों को मशीनें उपलब्ध कराकर पराली जलाने की समस्या को पूरी तरह खत्म करने का संकल्प और ‘जागरूक यात्रा’ के जरिए जमीनी स्तर पर डिजिटल व पारंपरिक माध्यमों से किसानों को जोड़ना यह दर्शाता है कि सरकार आधुनिक, टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल खेती के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
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