वैश्विक अनाज उत्पादन में 4 साल बाद पहली गिरावट की आशंका

अंतर्राष्ट्रीय अनाज परिषद (आईजीसी) की ताजा रिपोर्ट ने वैश्विक कृषि बाजार के लिए एक सतर्क करने वाला संकेत दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, आगामी 2026-27 सीजन में वैश्विक अनाज उत्पादन में पिछले चार साल में पहली बार गिरावट देखने को मिल सकती है। इस संभावित कमी का मुख्य कारण कम रकबे में फसल की कटाई और मौसम के मिजाज की वजह से उपज का कमजोर रहना माना जा रहा है।

परिषद ने स्पष्ट किया है कि वैश्विक गेहूं और मक्का उत्पादन के अनुमानों में पिछले महीने की तुलना में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन पिछले सीजन (2025-26) के मुकाबले स्थिति चिंताजनक है। आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक गेहूं उत्पादन में सालाना आधार पर 3 प्रतिशत की गिरावट आने की संभावना है, जिससे यह घटकर लगभग 8200 लाख टन के स्तर पर आ सकता है।

इसी तरह, मक्के के उत्पादन में भी 2 प्रतिशत की कमी का अनुमान है, जो घटकर 1.3 अरब टन रह सकता है। चावल के मोर्चे पर आईजीसी ने अपने पिछले महीने के अनुमानों में 30 लाख टन की कटौती की है। इसके बावजूद, राहत की बात यह है कि 2026-27 में चावल का उत्पादन पिछले सीजन के रिकॉर्ड 5450 लाख टन के स्तर के आसपास ही रहने की उम्मीद है।

हालांकि उत्पादन अनुमानों में कटौती हुई है, लेकिन आपूर्ति की स्थिति पिछले साल जैसी ही मजबूत बनी रहने के आसार हैं। रिपोर्ट में वैश्विक चावल व्यापार को लेकर काफी उत्साहजनक तस्वीर पेश की गई है। अनुमान है कि वैश्विक चावल व्यापार 4 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 620 लाख टन के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच जाएगा।

इस व्यापारिक तेजी का सबसे बड़ा कारण अफ्रीकी देशों से आने वाली चावल की मजबूत आयात मांग है, जो वैश्विक बाजार की गतिशीलता को बदलने में अहम भूमिका निभाएगी। उत्पादन में संभावित गिरावट के बावजूद, वैश्विक स्तर पर अनाज की खपत में कोई कमी आती नहीं दिख रही है। रिपोर्ट बताती है कि गेहूं, मक्का और जौ जैसे प्रमुख अनाजों की मांग लगातार बढ़ रही है।

खाद्य सुरक्षा, पशु आहार की आवश्यकता और औद्योगिक क्षेत्रों से आने वाली स्थिर मांग के चलते भविष्य में खपत के आंकड़े और ऊपर जा सकते हैं, जो सीमित उत्पादन के बीच बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ा सकते हैं।

निष्कर्ष: अंतर्राष्ट्रीय अनाज परिषद (आईजीसी) की रिपोर्ट वैश्विक खाद्य बाजार में एक संवेदनशील संतुलन की ओर इशारा करती है, जहाँ आगामी 2026-27 सीजन में कम रकबे और मौसम की मार के कारण पिछले चार वर्षों में पहली बार वैश्विक अनाज उत्पादन (विशेषकर गेहूं और मक्के) में गिरावट की आशंका है।

इसके विपरीत, चावल का उत्पादन अपने पिछले रिकॉर्ड स्तर के आसपास मजबूत बना रहेगा और अफ्रीकी देशों की उच्च मांग के चलते इसके वैश्विक व्यापार में ऐतिहासिक तेजी आने की उम्मीद है। हालांकि, उत्पादन में आ रही इस कमी के बावजूद खाद्य सुरक्षा, पशु आहार और उद्योगों के कारण अनाजों की वैश्विक खपत लगातार बढ़ रही है, जिससे आने वाले समय में सीमित आपूर्ति और बढ़ती मांग के बीच बाजार में प्रतिस्पर्धा और दबाव बढ़ने के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं।

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