सरसों RH 1975 की 38 मन उपज का सच: HAU हिसार की किस्म में बेसल, ब्रांचिंग और बुवाई दूरी का क्या रोल?

सरसों की खेती में किसान सबसे पहले क्या देखता है? पौधा कितना मजबूत है, नीचे से कितनी शाखाएं निकल रही हैं, फलियां कितनी लंबी हैं, एक फली में कितने दाने हैं और सबसे बड़ी बात यह कि आखिर प्रति एकड़ कितनी पैदावार मिल सकती है। क्योंकि खेती में सिर्फ पौधा हरा-भरा दिखने से काम नहीं चलता, किसान को आखिर में अपनी उपज और कमाई देखनी होती है।

बेसल ब्रांचिंग की खूबी: जमीन के निचले हिस्से से शाखाएं और फलियों का भारी घेरा

इसी नजरिए से अगर किसी सरसों की किस्म को देखा जाए तो HAU हिसार की आरएच 1975 इन दिनों किसानों और कृषि विशेषज्ञों के बीच चर्चा में है। इस किस्म की सबसे खास बात जो खेत में पहली नजर में दिखाई देती है, वह है इसकी बेसल ब्रांचिंग। यानी इसकी शाखाएं पौधे के काफी नीचे से ही निकलना शुरू हो जाती हैं। आम तौर पर किसान चाहता है कि पौधा सिर्फ ऊपर की तरफ न बढ़े, बल्कि नीचे से ही अच्छी तरह शाखाएं बनाए ताकि ज्यादा संख्या में फलियां लग सकें।

लंबी फलियां, मोटा चमकदार दाना और वजन संभालने वाला मजबूत तना

आरएच 1975 में यही विशेषता देखने को मिलती है। पौधे का फैलाव अच्छा दिखाई देता है और नीचे से निकलने वाली शाखाएं इसकी उत्पादन क्षमता को मजबूत आधार देने का काम करती हैं। अब अगर इसकी फलियों की बात करें तो यहां भी यह किस्म ध्यान खींचती है। इसकी फलियां लंबी दिखाई देती हैं और फलियों में दानों की संख्या भी अच्छी बताई गई है।

किसान के लिए फली की लंबाई सिर्फ देखने की चीज नहीं है। लंबी फली और उसमें ज्यादा दाने का सीधा संबंध संभावित उपज से है। यही वजह है कि खेत में जब किसान इस किस्म को देखता है तो उसकी नजर सबसे पहले फलियों पर जाती है और यहीं से उसे अंदाजा लगने लगता है कि पौधे में उत्पादन की क्षमता कैसी है।

इसके दाने की बनावट भी इसकी एक खास पहचान बताई गई है। दाना मोटा, भरा हुआ और देखने में आकर्षक दिखाई देता है। आम किसान जब बाजार से महंगे बीज का पैकेट खरीदकर किसी हाइब्रिड या दूसरी किस्म की खेती करता है तो वह चाहता है कि फसल पकने के बाद दाना भी मजबूत और भरावदार मिले। आरएच 1975 में दाने की इसी बनावट को इसकी प्रमुख खूबियों में गिना जा रहा है। हालांकि केवल दाना देखकर पैदावार तय नहीं की जा सकती, लेकिन खेत में फली, दाने और पौधे की बनावट मिलकर इस किस्म को जरूर आकर्षक बनाते हैं।

एक और चीज जो किसान को प्रभावित करती है, वह है इसका तना। पौधे का नीचे का तना मोटा और मजबूत बताया गया है। नीचे से ही शाखाएं निकलने के बावजूद पौधे का तना अच्छी मजबूती रखता है। सरसों की फसल में पौधे का मजबूत होना बहुत जरूरी है, क्योंकि जैसे-जैसे फलियां और दाने बढ़ते हैं, पौधे पर वजन बढ़ता जाता है। अगर तना कमजोर हो तो पौधा अंतिम समय में गिर सकता है और गिरने के बाद कटाई में भी परेशानी बढ़ जाती है।

पौधे की 6 फीट ऊंचाई और RH 725 से तुलना: क्या आंधी में गिरेगी फसल?

इस किस्म के प्रदर्शन में यह भी बताया गया कि फलियों के वजन से पौधे जमीन की तरफ झुकने लगते हैं। यानी पौधे पर फलियों और दानों का भार अच्छी तरह दिखाई देता है। किसान के लिए यह दृश्य निश्चित रूप से आकर्षक होता है, लेकिन यहां एक बात समझना जरूरी है कि सिर्फ पौधे का झुकना ही ज्यादा पैदावार की गारंटी नहीं है। अंतिम उत्पादन मौसम, मिट्टी, सिंचाई, खाद, रोग-कीट प्रबंधन और फसल की पूरी देखभाल पर निर्भर करेगा।

इस किस्म की एक महत्वपूर्ण बात इसकी ऊंचाई भी है। बातचीत में करीब 6 फीट तक पौधे की ऊंचाई का उल्लेख किया गया, हालांकि वैज्ञानिक ने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित सीजन में बारिश और खेत में नमी अधिक रहने की वजह से पौधों की ऊंचाई बढ़ी। इसलिए किसान भाई केवल किसी एक खेत में पौधे की ऊंचाई देखकर अपने खेत में बिल्कुल वही परिणाम मिलने की उम्मीद न रखें। मौसम और खेती की परिस्थितियां पौधे की ऊंचाई पर काफी असर डालती हैं।

आरएच 1975 की तुलना पहले की लोकप्रिय आरएच 725 किस्म से भी की गई। किसानों की एक सामान्य शिकायत रही है कि कुछ किस्में अंतिम समय में ज्यादा ऊंची होकर गिर जाती हैं। नई किस्म में पौधे की संरचना, शाखाओं और फलियों को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया है। हालांकि खेत और मौसम के हिसाब से पौधे की ऊंचाई अलग-अलग हो सकती है, इसलिए इसे हर परिस्थिति में पूरी तरह न गिरने वाली किस्म मान लेना सही नहीं होगा।

30 से 38 मन प्रति एकड़ पैदावार का सच: क्या हर किसान को मिलेगी इतनी उपज?

बात अगर पैदावार की करें तो यही हिस्सा किसानों के लिए सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। दिए गए प्रदर्शन और किसानों के अनुभव के अनुसार पिछले सीजन में दो किसानों ने इस किस्म से करीब 38 मन प्रति एकड़ तक उत्पादन लेने की बात बताई। वहीं 30 से 35 मन प्रति एकड़ के आसपास उत्पादन लेने वाले कई किसानों का भी उल्लेख किया गया। अगर किसी किसान को वास्तव में 30 से 35 मन प्रति एकड़ तक उपज मिलती है तो यह निश्चित रूप से आकर्षक उत्पादन माना जाएगा।

लेकिन किसान भाई यहां सबसे जरूरी बात समझें। किसी प्रदर्शन खेत या कुछ किसानों द्वारा हासिल की गई अधिकतम पैदावार को हर किसान के खेत की गारंटी नहीं माना जा सकता। 38 मन प्रति एकड़ का आंकड़ा एक बताए गए किसान अनुभव के रूप में देखना चाहिए, न कि निश्चित उत्पादन के रूप में। आपकी जमीन, बुवाई का समय, बीज की गुणवत्ता, पौध संख्या, सिंचाई, पोषण, रोग-कीट और मौसम सभी चीजें उत्पादन को बदल सकती हैं।

हाइब्रिड नहीं वैरायटी है RH 1975: हर साल नया बीज खरीदने से मिलेगी मुक्ति

इस किस्म का एक दूसरा बड़ा फायदा बीज को लेकर बताया गया है। बातचीत में यह बात कही गई कि यह एक वैरायटी है, हाइब्रिड नहीं। इसलिए किसान अपनी फसल से बीज सुरक्षित करके अगले सीजन में इस्तेमाल कर सकता है। सही तरीके से चयन और भंडारण किया जाए तो किसान अपने स्तर पर बीज रखकर आगे उपयोग कर सकता है। यही बात इसे हाइब्रिड से अलग बनाती है, क्योंकि हाइब्रिड बीज में किसान को सामान्यतः हर सीजन नया बीज खरीदना पड़ता है।

किसान के लिए यह आर्थिक रूप से भी महत्वपूर्ण बात है। खेती में सिर्फ उत्पादन नहीं देखा जाता, बल्कि बीज की लागत भी देखी जाती है। अगर कोई किसान हर साल महंगा बीज खरीदता है तो उत्पादन अच्छा होने के बावजूद लागत बढ़ जाती है। दूसरी तरफ किसी उपयुक्त वैरायटी में किसान अपनी फसल से बीज सुरक्षित कर पाता है तो अगले सीजन की बीज लागत कम हो सकती है। हालांकि बीज बचाने के मामले में किसान को भी सावधानी रखनी चाहिए और अच्छे, स्वस्थ तथा सही किस्म के पौधों से ही बीज का चयन करना चाहिए।

15 अक्टूबर बुवाई, 18 इंच कतार की दूरी और किसान सलाह

आरएच 1975 के प्रदर्शन में 15 अक्टूबर 2025 की बुवाई का उल्लेख किया गया। लाइन से लाइन दूरी करीब 18 इंच और पौधे से पौधे की दूरी करीब आधा फीट यानी लगभग 15 सेंटीमीटर बताई गई। इससे यह समझ आता है कि प्रदर्शन में पौधों के बीच उचित दूरी रखते हुए शाखाओं और पौधे के फैलाव को ध्यान में रखा गया था। लेकिन किसान भाई अपने क्षेत्र की मिट्टी, सिंचाई व्यवस्था और कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार बुवाई की दूरी तय करें।

इस किस्म की तुलना आरएच 2101 जैसे हाइब्रिड से भी की गई। वैज्ञानिक की बात का मतलब साफ है कि हाइब्रिड की अपनी विशेषताएं होती हैं और कई परिस्थितियों में उनकी प्रति हेक्टेयर या प्रति क्षेत्र उत्पादकता अधिक हो सकती है। वहीं विश्वविद्यालय की जिम्मेदारी सिर्फ हाइब्रिड विकसित करना नहीं बल्कि किसानों के लिए अच्छी वैरायटी विकसित करना भी है।

इसलिए किसान को वैरायटी और हाइब्रिड में से किसी एक को हमेशा बेहतर मानने के बजाय अपनी लागत, जमीन, बाजार और उत्पादन लक्ष्य के हिसाब से चुनाव करना चाहिए। मेरे हिसाब से आरएच 1975 में किसान को आकर्षित करने वाली कई बातें एक साथ दिखाई देती हैं। नीचे से शाखाएं, मजबूत तना, अच्छी फलियां, फलियों में ज्यादा दाने, मोटा और भरा हुआ दाना तथा बीज को आगे उपयोग करने की संभावना। यही कारण है कि खेत में इस किस्म को देखने वाला किसान इसकी तरफ जरूर ध्यान देता है।

लेकिन किसान भाई एक बात हमेशा याद रखें। किसी भी नई या चर्चित किस्म को बड़े क्षेत्र में लगाने से पहले अपने खेत में छोटे स्तर पर परीक्षण करना सबसे समझदारी वाला कदम है। अपने क्षेत्र के किसी कृषि विज्ञान केंद्र, विश्वविद्यालय या कृषि विशेषज्ञ से जानकारी लें और वहां के मौसम तथा मिट्टी के हिसाब से इसकी उपयुक्तता समझें। सिर्फ किसी वीडियो में दिखाई गई फसल देखकर पूरा खेत एक ही किस्म के नाम कर देना सही फैसला नहीं होगा।

अगर आपके क्षेत्र में आरएच 1975 उपलब्ध है और आपके इलाके के किसानों ने इसे पहले से लगाया है, तो उनसे वास्तविक उत्पादन, बीज लागत, सिंचाई, रोग-कीट की स्थिति और मंडी में मिले भाव की जानकारी जरूर लें। खेती में असली फैसला खेत देखकर और हिसाब लगाकर ही करना चाहिए। कुल मिलाकर, आरएच 1975 सरसों की वह किस्म दिखाई देती है जिसमें पौधे की संरचना से लेकर फली और दाने तक कई ऐसी विशेषताएं बताई गई हैं जो किसान की नजर में महत्वपूर्ण होती हैं।

30 से 35 मन प्रति एकड़ तक की बताई गई उपज और कुछ किसानों द्वारा 38 मन तक उत्पादन लेने का दावा इसे जरूर चर्चा में लाता है। लेकिन किसान भाई इसे संभावित प्रदर्शन के रूप में देखें, पक्की गारंटी के रूप में नहीं। अच्छी किस्म के साथ सही बुवाई, संतुलित पोषण, समय पर सिंचाई, रोग-कीट नियंत्रण और मौसम का साथ मिलेगा तभी खेत में अच्छी पैदावार का सपना पूरा होगा।

अस्वीकरण (Disclaimer): यह आलेख Anil Kumar Prasad द्वारा अपने 5 वर्षों के धरातलीय खेती के अनुभव, शोधपरक कृषि रिपोर्टों और किसानों के वास्तविक हितों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य आधुनिक तकनीक, सरकारी योजनाओं और व्यावहारिक ज्ञान के जरिए किसानों को सशक्त बनाना है। अपनी राय और सुझाव WhatsApp पर जरूर साझा करें।

निष्कर्ष: चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (CCSHAU हिसार) द्वारा विकसित ‘आरएच 1975’ सरसों निश्चित रूप से उन प्रगतिशील किसानों के लिए एक बेहतरीन विकल्प बनकर उभरी है जो हाइब्रिड बीजों पर हर साल होने वाले भारी खर्च से बचना चाहते हैं। इसकी बेसल ब्रांचिंग, मजबूत तना और 30 से 35 मन प्रति एकड़ तक की संभावित पैदावार इसे एक शक्तिशाली वैरायटी बनाती है।

हालांकि, किसानों को यह ध्यान रखना चाहिए कि 38 मन प्रति एकड़ की अधिकतम उपज केवल किस्म के नाम से नहीं, बल्कि 15 से 25 अक्टूबर के बीच सही दूरी पर बुवाई, संतुलित सल्फर व NPK पोषण, समय पर सिंचाई और मौसम के अनुकूल साथ से ही संभव है। इसलिए पूरा खेत एक साथ लगाने से पहले अपने क्षेत्र में इसका परीक्षण जरूर करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1. क्या सरसों की RH 1975 किस्म हाइब्रिड है या वैरायटी?

उत्तर: RH 1975 एक उन्नत वैरायटी (Variety) है, हाइब्रिड नहीं। इसलिए किसान अपनी ही फसल के स्वस्थ दानों को अगले सीजन में बीज के रूप में दोबारा बो सकते हैं।

Q2. RH 1975 सरसों की ‘बेसल ब्रांचिंग’ का क्या अर्थ है?

उत्तर: इसका अर्थ है कि शाखाएं मुख्य तने के बिल्कुल निचले हिस्से (जमीन के करीब) से ही निकलना शुरू हो जाती हैं, जिससे पौधे का घेरा बड़ा बनता है और अधिक फलियां लगती हैं।

Q3. क्या RH 1975 से वास्तव में 35 से 38 मन प्रति एकड़ उपज मिल सकती है?

उत्तर: प्रगतिशील किसानों के प्रदर्शन खेतों में अनुकूल मौसम और संतुलित पोषण के साथ 30 से 35 मन (और कुछ में 38 मन) उपज दर्ज हुई है, लेकिन यह उत्पादन खेत की मिट्टी, सिंचाई और मौसम पर निर्भर करता है।

Q4. RH 1975 सरसों की बुवाई का सर्वोत्तम समय और दूरी क्या है?

उत्तर: इसकी बुवाई 15 अक्टूबर से 25 अक्टूबर के बीच सर्वोत्तम मानी जाती है। लाइन से लाइन की दूरी 18 इंच (45 सेमी) और पौधे से पौधे की दूरी 15 सेमी रखनी चाहिए।

Q5. क्या RH 1975 सरसों तेज हवा में गिरती (Lodging) नहीं है?

उत्तर: इसका निचला तना अन्य किस्मों की तुलना में काफी मोटा और मजबूत होता है, जिससे गिरने का जोखिम कम होता है; हालांकि अत्यधिक नमी और तेज आंधी में कोई भी पौधा प्रभावित हो सकता है।

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