हिमाचल प्रदेश के 6 जिलों में मक्का पर फॉल आर्मीवर्म का हमला, कृषि वैज्ञानिकों ने जारी की चेतावनी; जानें बचाव के सटीक उपाय

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा, हमीरपुर, मंडी, ऊना, बिलासपुर और चंबा जिलों में मक्का की फसल में खतरनाक फॉल आर्मीवर्म का प्रकोप सामने आया है। इसके बाद कृषि वैज्ञानिकों द्वारा किसानों को अत्यधिक सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

मक्का की फसल में फॉल आर्मीवर्म: पहचान और नुकसान

चौधरी सरवन कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने किसानों से समेकित कीट प्रबंधन अपनाने की अपील की है। कीट का प्रकोप दिखाई देने पर किसानों को तुरंत विश्वविद्यालय या अपने निकटतम कृषि विज्ञान केंद्र से तकनीकी मार्गदर्शन लेने को कहा गया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, फॉल आर्मीवर्म मक्का की पत्तियों, नर पुष्प (टैसल) और भुट्टों को गंभीर नुकसान पहुंचाता है। इसके लार्वा पौधों के ऊतकों और तनों में घुसकर फसल को भीतर से नष्ट कर देते हैं, जिससे मक्का के उत्पादन में भारी कमी आ सकती है।

फॉल आर्मीवर्म की पहचान के शुरुआती लक्षण

विश्वविद्यालय के कीट विज्ञान विभाग के प्रमुख डॉ. सुरजीत कुमार ने बताया कि किसान अपने खेतों का नियमित निरीक्षण करें। उन्होंने नई पत्तियों पर कांच जैसी पारदर्शी खुरचन, अनियमित छेद तथा मक्का के भंवर (व्हॉल) में लार्वा और उसकी बीट जैसे शुरुआती लक्षणों पर कड़ी नजर रखने की सलाह दी है। समय रहते पहचान होने से फसल के नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है।

समेकित कीट प्रबंधन (IPM) और नियंत्रण के उपाय

समेकित कीट प्रबंधन के तहत विश्वविद्यालय ने नियमित निगरानी, अंडों और लार्वा को नष्ट करने, खेतों की साफ-सफाई बनाए रखने, लाभकारी (मित्र) कीटों का संरक्षण करने और फेरोमोन ट्रैप लगाने की सलाह दी है। इसके अलावा, विशेषज्ञों ने बिना आवश्यकता के कीटनाशकों के अंधाधुंध छिड़काव से बचने को कहा है।

रासायनिक नियंत्रण के लिए वैज्ञानिकों की सिफारिश

कीटनाशकों का उपयोग तभी किया जाना चाहिए जब फसल को 10 प्रतिशत से अधिक नुकसान हो चुका हो या कीटों की संख्या आर्थिक क्षति स्तर तक पहुंच जाए। ऐसी आपात स्थिति में निम्नलिखित दवाओं के छिड़काव की सिफारिश की गई है:

  • इमामेक्टिन बेंजोएट 5 SG: 0.4 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से।
  • क्लोरैन्ट्रानिलिप्रोल 18.5 SC: 0.4 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी की दर से।

वैज्ञानिकों ने निर्देश दिया है कि छिड़काव करते समय यह सुनिश्चित किया जाए कि दवा मक्का के भंवर (व्हॉल) तक अच्छी तरह पहुंचे तथा अनुशंसित मात्रा और सुरक्षा संबंधी सभी सावधानियों का कड़ाई से पालन किया जाए।

निष्कर्ष: मक्का के किसानों के लिए फॉल आर्मीवर्म एक बड़ी चुनौती है, लेकिन घबराने की जगह समय पर खेत की निगरानी और वैज्ञानिक सलाह पर अमल करना ही इसका एकमात्र समाधान है। कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा सुझाए गए समेकित कीट प्रबंधन और अनुशंसित कीटनाशकों का सही मात्रा में छिड़काव करके इस कीट के नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है। किसानों की जागरूकता और त्वरित कार्रवाई ही उनकी मेहनत और फसल दोनों को सुरक्षित रखेगी।

Frequently Asked Questions (FAQ)

Q. फॉल आर्मीवर्म मक्का की फसल को कैसे नुकसान पहुँचाता है?

Ans. फॉल आर्मीवर्म का लार्वा मक्का की कोमल पत्तियों, नर पुष्पों (टैसल) और भुट्टों को खाता है। यह पत्तियों में अनियमित छेद करता है और पौधों के ऊतकों व तनों में घुसकर फसल को भीतर से नष्ट कर देता है, जिससे उत्पादन में भारी कमी आ सकती है।

Q. मक्का में फॉल आर्मीवर्म कीट के हमले की पहचान कैसे करें?

Ans. खेत का नियमित निरीक्षण करें। नई पत्तियों पर कांच जैसी पारदर्शी खुरचन, अनियमित छेद और मक्का के भंवर (व्हॉल) में लार्वा या उसकी बीट (मल) दिखाई देना इसके प्रमुख शुरुआती लक्षण हैं।

Q. फॉल आर्मीवर्म नियंत्रण के लिए वैज्ञानिकों ने किन दवाओं के छिड़काव की सिफारिश की है?

Ans. कृषि वैज्ञानिकों ने इमामेक्टिन बेंजोएट 5 SG (0.4 ग्राम प्रति लीटर पानी) या क्लोरैन्ट्रानिलिप्रोल 18.5 SC (0.4 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी) के छिड़काव की सिफारिश की है। छिड़काव करते समय दवा का पौधों के भंवर (Whall) तक पहुँचना अनिवार्य है।

यह भी पढ़े: खरपतवारनाशी पैराक्वाट डाइक्लोराइड पर देशभर में लगेगा प्रतिबंध, केंद्र सरकार ने जारी की अधिसूचना; जानें मुख्य वजह

जागरूक रहिए व नुकसान से बचिए और अन्य लोगों के जागरूकता के लिए साझा करें। कृषि लेख, सरकारी योजनाएं, कृषि तकनीक, व्यवसायिक एवं जैविक खेती से संबंधित सटीक जानकारियां प्राप्त करने के लिए जुड़े कृषि जागृति चलो गांव की ओर से या कृषि संबंधित किसी भी समस्या के जैविक समाधान के लिए WhatsApp करें।