इफको को अपने नैनो एनपीके लिक्विड (8-8-10) और नैनो एनपीके ग्रेन्युलर (20-10-10) उर्वरकों के लिए मंजूरी मिल गई है, जिसे भारत के नैनो उर्वरक क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति माना जा रहा है। इनमें से लिक्विड वेरिएंट को पत्तियों पर छिड़काव के लिए बनाया गया है, जबकि ग्रेन्युलर वेरिएंट का उपयोग मिट्टी और जड़ों के माध्यम से पोषक तत्व उपलब्ध कराने के लिए किया जा सकता है। इससे फसल के महत्वपूर्ण विकास चरणों में लक्षित पोषण देना संभव होगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, ये नैनो उर्वरक पोषक तत्व उपयोग दक्षता बढ़ाने, संतुलित उर्वरक उपयोग को प्रोत्साहित करने और पारंपरिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने में सहायक होंगे। इससे किसानों की लागत में कमी, उत्पादकता में वृद्धि और मिट्टी की सेहत में सुधार की संभावना है। इसके अलावा, पोषक तत्वों के नुकसान को कम करने के कारण ये उत्पाद पर्यावरण के अनुकूल विकल्प के रूप में उभरते हैं और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देते हैं।
वैश्विक स्तर पर उर्वरक आपूर्ति में आ रही चुनौतियों के बीच यह नवाचार आयात पर निर्भरता कम करने और भारत की कृषि-प्रौद्योगिकी क्षमताओं को मजबूत करने में भी अहम भूमिका निभा सकता है। इफ्को नैनो एनपीके को मिली यह हरी झंडी केवल एक उत्पाद की मंजूरी नहीं है, बल्कि यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘सशक्त किसान’ की दिशा में एक बड़ा कदम है। कम लागत, अधिक उपज और सुरक्षित पर्यावरण- यही है आधुनिक खेती का नया मंत्र।
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