क्रिसिल रेटिंग्स के अनुसार पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद चालू और अगले वित्त वर्ष में भारत का बासमती चावल निर्यात काफी हद तक स्थिर रहने की संभावना है। रिपोर्ट के मुताबिक निर्यात में पिछले वर्ष के 60.6 लाख टन के मुकाबले अधिकतम 2 प्रतिशत तक की मामूली वृद्धि हो सकती है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान को होने वाले निर्यात में कमी आ सकती है, लेकिन सऊदी अरब, इराक, यूएई और यमन जैसे बाजारों से बढ़ती मांग इस कमी की भरपाई कर सकती है। हालांकि निर्यातकों को लॉजिस्टिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिनमें जहाजों की कमी, लंबा ट्रांजिट समय और भुगतान में देरी शामिल है। इन कारणों से कार्यशील पूंजी की जरूरत 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ सकती है।
इसके बावजूद बढ़ी हुई माल ढुलाई और बीमा लागत को खरीदारों पर स्थानांतरित किए जाने से मुनाफे पर सीमित असर पड़ने की संभावना है।भारत वैश्विक बासमती चावल व्यापार में लगभग 85 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है और कुल उत्पादन का करीब दो-तिहाई हिस्सा निर्यात किया जाता है। इसमें ईरान का योगदान करीब 14 प्रतिशत है, जबकि व्यापक रूप से पश्चिम एशिया क्षेत्र की हिस्सेदारी 70 प्रतिशत से अधिक है।
क्रिसिल का अनुमान है कि यदि व्यवधान लंबे समय तक जारी रहता है, तो विशेषकर होर्मुज जलडमरूमध्य में, तो निकट अवधि में निर्यात में 3.5 से 3.7 लाख टन तक की कमी आ सकती है। हालांकि अन्य बाजारों से स्थिर मांग के चलते कुल प्रभाव सीमित रहने की उम्मीद है।
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