भारत से गोबर और गोबर-आधारित उत्पादों का निर्यात तेज़ी से बढ़ रहा है, जो वैश्विक स्तर पर टिकाऊ खेती और जैविक इनपुट की बढ़ती मांग का संकेत है। वर्तमान में वैश्विक गोबर एवं जैविक खाद बाजार का आकार लगभग 6,700 करोड़ रुपय आंका गया है, और भारत संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब तथा ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के लिए एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता के रूप में उभर रहा है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023-24 में भारत ने 125 करोड़ रुपय मूल्य का कच्चा गोबर तथा 173.7 करोड़ रुपय की गोबर-आधारित खाद का निर्यात किया। कुल मिलाकर गोबर और संबंधित उत्पादों का निर्यात 400 करोड़ रुपय से अधिक रहा, जो इस क्षेत्र की तीव्र संभावनाओं को दर्शाता है।
विदेशी मांग बढ़ने से घरेलू कीमतों में भी मजबूती आई है। कच्चा गोबर 30 से 50 रुपय प्रति किलोग्राम बिक रहा है, जबकि प्रसंस्कृत जैविक खाद 50 से 180 रुपय प्रति पैक तक उपलब्ध है। प्रीमियम उत्पादों की कीमत 200 रुपय तक पहुंच रही है। खाड़ी देशों में कच्चे गोबर के लिए 50 रुपय प्रति किलोग्राम तक भुगतान किया जा रहा है, जिससे निर्यात आकर्षक बन गया है।
उद्योग से जुड़े अनुमानों के अनुसार, छोटे उद्यम 50,000 से 2 लाख रुपय के शुरुआती निवेश से प्रतिमाह 50,000 से 1 लाख रुपय तक कमा सकते हैं, बशर्ते बाजार तक की पहुंच अच्छी हो। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रीमियम जैविक खाद की कीमत 2026 तक लगभग 260 डॉलर प्रति टन तक पहुंचने का अनुमान है। देश में राष्ट्रीय बायोगैस कार्यक्रम के तहत छोटे बायोगैस संयंत्रों के लिए 50 प्रतिशत तक की सब्सिडी उपलब्ध है, जिससे इस उभरते निर्यात क्षेत्र में भारत की स्थिति और मजबूत होने की संभावना है।
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