जनवरी 2026 में भारत के तेल खली निर्यात में तेज गिरावट दर्ज की गई। साल-दर-साल आधार पर निर्यात 42.5 प्रतिशत घटकर 2.60 लाख टन रह गया, जबकि पिछले वर्ष इसी महीने यह 4.52 लाख टन था। गिरावट की मुख्य वजह सोयाबीन खली और सरसों खली की खेपों में आई भारी कमी रही। सोयाबीन खली का निर्यात 2.86 लाख टन से घटकर 1.32 लाख टन रह गया, जबकि सरसों खली की खेप 1.31 लाख टन से घटकर 64,782 टन पर आ गई। इन दोनों प्रमुख उत्पादों में कमी ने कुल व्यापार प्रदर्शन पर स्पष्ट दबाव डाला।
चालू वित्त वर्ष 2025-26 के अप्रैल से जनवरी के दौरान कुल निर्यात 10 प्रतिशत घटकर 32.35 लाख टन रहा, जबकि पिछले वर्ष समान अवधि में यह 36.03 लाख टन था। दक्षिण कोरिया को निर्यात 5.99 लाख टन से घटकर 3.15 लाख टन पर आ गया। बांग्लादेश ने भी आयात कम करते हुए 6.21 लाख टन के मुकाबले 3.33 लाख टन ही खरीदा।
हालांकि, चीन को निर्यात में उल्लेखनीय उछाल दर्ज हुआ। इस अवधि में चीन को 7.18 लाख टन तेल खली भेजी गई, जो पिछले वर्ष केवल 31,105 टन थी। यह वृद्धि मुख्य रूप से सरसों खली की बढ़ी मांग के कारण रही। यूरोप में जर्मनी और फ्रांस द्वारा सोयाबीन खली की खरीद जारी रहने से निर्यात को आंशिक सहारा मिला। कुल मिलाकर, सोयाबीन और सरसों खली के कमजोर प्रदर्शन से निर्यात दबाव में है, हालांकि चीन जैसे बाजारों में उभरती मांग कुछ संतुलन प्रदान कर रही है।
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