राजस्थान के जालोर जिले के करड़ा क्षेत्र से एक बेहद चिंताजनक मामला सामने आया है। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार करड़ा और आसपास के क्षेत्रों में करीब 10 स्थानों पर बाजरे का बीज बिना वैध लाइसेंस और बिना पक्के बिल के खुलेआम बेचा जा रहा है। सबसे गंभीर बात यह है कि कई बीज पैकेटों पर बैच नंबर, अंकुरण प्रतिशत और अन्य आवश्यक जानकारी तक दर्ज नहीं है।
किसानों से मनमाने दाम वसूले जा रहे हैं, जबकि उन्हें खरीद का कोई वैध प्रमाण भी नहीं दिया जा रहा। ऐसे हालात में किसानों की मेहनत, पैसा और पूरी फसल जोखिम में पड़ सकती है। बाजरा खरीफ सीजन की महत्वपूर्ण फसल है। किसान अच्छी गुणवत्ता वाले बीज पर भरोसा करके अपनी पूरी खेती की योजना बनाते हैं। यदि बीज ही खराब या अप्रमाणित निकल जाए तो उसका असर केवल अंकुरण पर नहीं बल्कि पूरे उत्पादन पर पड़ता है।
कई बार किसान दोबारा बुवाई करने के लिए मजबूर हो जाते हैं, जिससे बीज, मजदूरी, सिंचाई और अन्य कृषि कार्यों पर अतिरिक्त खर्च बढ़ जाता है। यदि दोबारा बुवाई का समय भी निकल जाए तो पूरे सीजन की फसल प्रभावित हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार कई जगहों पर बिना कंपनी के अधिकृत दस्तावेजों के बीज बेचे जा रहे हैं।
कुछ पैकेटों पर न तो बैच नंबर है और न ही अंकुरण प्रतिशत लिखा गया है। सामान्यतः किसी भी प्रमाणित बीज के पैकेट पर बैच नंबर, उत्पादन तिथि, वैधता अवधि, अंकुरण प्रतिशत, शुद्धता, निर्माता का नाम और अन्य आवश्यक विवरण अंकित होना चाहिए। यही जानकारी किसान को यह भरोसा देती है कि वह गुणवत्तापूर्ण और प्रमाणित बीज खरीद रहा है।
सबसे बड़ी समस्या तब आती है जब किसान बिना पक्के बिल के बीज खरीद लेते हैं। कई किसान थोड़ी कम कीमत या जल्द उपलब्धता के कारण बिना बिल बीज खरीद लेते हैं, लेकिन बाद में यदि बीज अंकुरित नहीं होता या गुणवत्ता खराब निकलती है तो उनके पास शिकायत करने का कोई मजबूत आधार नहीं बचता।
बीमा, मुआवजा या कानूनी कार्रवाई के मामलों में खरीद का पक्का बिल सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जाता है। कृषि विशेषज्ञ हमेशा सलाह देते हैं कि बीज केवल अधिकृत और लाइसेंसधारी विक्रेता से ही खरीदना चाहिए। खरीद के समय विक्रेता का लाइसेंस अवश्य देखें और पक्का बिल लेना कभी न भूलें।
बिल पर बीज का नाम, कंपनी का नाम, मात्रा, कीमत और खरीद की तारीख स्पष्ट रूप से दर्ज होनी चाहिए। यही दस्तावेज भविष्य में किसी भी विवाद या शिकायत की स्थिति में किसान के अधिकारों की रक्षा करता है। अंकुरण प्रतिशत भी बीज की गुणवत्ता का महत्वपूर्ण संकेतक होता है। यदि पैकेट पर अंकुरण प्रतिशत ही नहीं लिखा है तो किसान यह नहीं जान पाएगा कि बीज से कितने पौधे निकलने की संभावना है। ऐसे बीज खरीदना पूरी तरह जोखिम भरा हो सकता है।
इसी प्रकार बैच नंबर न होने पर यह पता लगाना भी मुश्किल हो जाता है कि बीज किस उत्पादन लॉट का है और उसकी गुणवत्ता की जांच कैसे की जाए। कई बार नकली या निम्न गुणवत्ता वाले बीज शुरुआत में सामान्य दिखाई देते हैं, लेकिन खेत में बुवाई के बाद उनकी वास्तविक स्थिति सामने आती है। कहीं अंकुरण कम होता है, कहीं पौधों की बढ़वार कमजोर रहती है और कहीं उत्पादन क्षमता बहुत कम हो जाती है। किसान तब तक काफी समय और पैसा निवेश कर चुका होता है।
इसलिए शुरुआत में थोड़ी सावधानी भविष्य के बड़े नुकसान से बचा सकती है। यदि आप बाजरे या किसी भी फसल का बीज खरीदने जा रहे हैं तो कुछ जरूरी बातों का विशेष ध्यान रखें। हमेशा सीलबंद पैकेट खरीदें। पैकेट पर निर्माता कंपनी का नाम, बैच नंबर, अंकुरण प्रतिशत, उत्पादन एवं वैधता तिथि अवश्य जांचें। खरीद के बाद पक्का बिल सुरक्षित रखें।
यदि विक्रेता बिल देने से मना करे या बिना लाइसेंस बीज बेचता दिखाई दे तो इसकी सूचना तुरंत कृषि विभाग के अधिकारियों को दें।यदि किसी किसान को संदेह है कि खरीदा गया बीज खराब गुणवत्ता का है या अंकुरण अपेक्षा से बहुत कम हुआ है, तो वह संबंधित कृषि विभाग में शिकायत दर्ज करा सकता है। समय पर शिकायत करने और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध होने पर जांच की जा सकती है। लेकिन बिना बिल के शिकायत करना काफी कठिन हो जाता है।
किसानों को यह भी समझना होगा कि कुछ रुपये बचाने के चक्कर में बिना बिल या बिना प्रमाणित बीज खरीदना भविष्य में हजारों या लाखों रुपये का नुकसान करा सकता है। खेती में बीज सबसे महत्वपूर्ण निवेश होता है। यदि बीज सही नहीं है तो बाकी सभी कृषि कार्यों का अपेक्षित लाभ मिलना मुश्किल हो जाता है। प्रशासन और कृषि विभाग की भी जिम्मेदारी है कि ऐसे मामलों में नियमित निरीक्षण करें और बिना लाइसेंस बीज बेचने वाले विक्रेताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें।
इससे किसानों का विश्वास बना रहेगा और नकली या अप्रमाणित बीजों की बिक्री पर रोक लगेगी। साथ ही किसानों को भी जागरूक रहना होगा और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना संबंधित अधिकारियों तक पहुंचानी होगी। यदि आपके क्षेत्र में भी बिना लाइसेंस, बिना बिल या संदिग्ध गुणवत्ता वाले बीज बेचे जा रहे हैं तो चुप न रहें।
अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहें, केवल प्रमाणित बीज खरीदें और हमेशा पक्का बिल लें। आपकी छोटी सी सावधानी आपकी पूरी फसल और सालभर की मेहनत को सुरक्षित रख सकती है।
निष्कर्ष: जालोर के करड़ा क्षेत्र से सामने आई यह रिपोर्ट केवल चंद दुकानदारों की मनमानी नहीं, बल्कि सीधे तौर पर अन्नदाता की सालभर की उम्मीदों पर डाका डालने जैसा है। जब महंगे दाम चुकाने के बाद भी किसान को बिना बैच नंबर और बिना गारंटी का बीज मिले, तो कृषि सुरक्षा पूरी तरह खतरे में पड़ जाती है।
समाधान केवल कृषि विभाग के छापों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि हर ब्लॉक स्तर पर बीज की शुद्धता जांचने की त्वरित व्यवस्था होनी चाहिए। किसानों को भी सजग होना होगा- आज बिना बिल के खरीदा गया एक पैकेट कल पूरे खेत को बंजर बना सकता है।
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