सरकार ने कपास क्षेत्र के लिए 5,659 करोड़ का मेगा मिशन किया मंजूर

केंद्र सरकार ने देश के कपास क्षेत्र में आ रही गिरावट और गुणवत्ता संबंधी चुनौतियों को दूर करने के लिए एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। सरकार ने 5,659.22 करोड़ रुपये के एक नए पंचवर्षीय मिशन को मंजूरी दी है, जो कपास की उत्पादकता बढ़ाने और वैश्विक बाजार में भारत की पकड़ मजबूत करने पर केंद्रित होगा।

यह मिशन सरकार के प्रसिद्ध ‘5F विजन’ पर आधारित है। इसका अर्थ है- खेत (Farm) से रेशा (Fiber), फाइबर से कारखाना (Factory), फैक्ट्री से फैशन (Fashion) और फैशन से विदेशी बाजार (Foreign)। इस विजन के जरिए कपास के पूरे मूल्य चक्र को आधुनिक बनाया जाएगा। मिशन का सबसे प्रमुख लक्ष्य पैदावार में बड़ी बढ़ोतरी करना है।

इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए उच्च उपज देने वाली और कीट-रोधी बीज किस्मों के विकास पर जोर दिया जाएगा। इसमें भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के 10 संस्थान और कई राज्यों के कृषि विश्वविद्यालय मिलकर काम करेंगे। आधुनिक तकनीकों को सीधे किसानों के खेतों तक पहुँचाया जाएगा।

वर्तमान में देश की कपास उत्पादकता करीब 440 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर है, जिसे सरकार वर्ष 2031 तक बढ़ाकर 755 किलोग्राम करना चाहती है। इसके सफल होने पर कुल उत्पादन 291 लाख गांठ से बढ़कर 498 लाख गांठ तक पहुंच जाएगा।

यह मिशन केवल खेती तक सीमित नहीं है। सरकार का उद्देश्य उद्योग को कम प्रदूषण वाला और उच्च गुणवत्ता वाला कपास उपलब्ध कराना है। इससे भारतीय कपास की अंतरराष्ट्रीय मांग बढ़ेगी और निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। कपास प्रसंस्करण में लगी करीब 2,000 इकाइयों को भी इस मिशन का हिस्सा बनाया जाएगा।

शुरुआती चरण में देश के 14 राज्यों के 140 जिलों को प्राथमिकता के आधार पर चुना गया है। इस पूरी पहल से देशभर के करीब 32 लाख कपास किसानों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। यह कदम न केवल किसानों की आय बढ़ाएगा, बल्कि वस्त्र उद्योग के लिए कच्चे माल की आत्मनिर्भरता भी सुनिश्चित करेगा।

मिशन के सफल क्रियान्वयन की जिम्मेदारी कृषि मंत्रालय और वस्त्र मंत्रालय को संयुक्त रूप से सौंपी गई है। वैज्ञानिक अनुसंधान और जमीनी स्तर पर कृषि विज्ञान केंद्रों की भागीदारी से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कपास क्षेत्र की हर बाधा को तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर दूर किया जा सके।

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