भारत सरकार ने चावल निर्यातकों को एक बड़ी राहत देते हुए यूरोप के कुछ विशिष्ट बाजारों के लिए नियमों में महत्वपूर्ण ढील दी है। इस फैसले के तहत बासमती और गैर-बासमती, दोनों ही प्रकार के चावल के निर्यात पर अनिवार्य निरीक्षण प्रमाणपत्र से अगले छह महीनों के लिए छूट दे दी गई है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य निर्यात प्रक्रिया को पहले से अधिक सरल और सुचारु बनाना है।
सरकारी अधिसूचना में यह स्पष्ट किया गया है कि निर्यात निरीक्षण परिषद द्वारा जारी प्रमाणपत्र अब भी यूरोपीय संघ के सदस्य देशों, ब्रिटेन, आइसलैंड, लिकटेंस्टीन, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड के लिए अनिवार्य बना रहेगा।
इन देशों को छोड़कर शेष यूरोपीय देशों के लिए यह छूट तत्काल प्रभाव से लागू होगी। इस अवधि के दौरान निर्यातकों को कड़े निरीक्षण प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने की आवश्यकता नहीं होगी।
यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब वैश्विक व्यापारिक परिस्थितियां काफी अनिश्चित बनी हुई हैं और माल ढुलाई की लागत भी काफी ऊंची है। सरकार का मुख्य लक्ष्य निर्यातकों को राहत देना और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय चावल की समयबद्ध पहुँच सुनिश्चित करना है।
चावल उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि इस छूट से बंदरगाहों और गोदामों में होने वाली देरी कम होगी। पहले प्रमाणन प्रक्रिया के कारण कई बार शिपमेंट रुक जाते थे, जिससे ऑपरेशनल खर्च बढ़ जाते थे।
अब इस नए बदलाव से व्यापारियों को बेहतर लचीलापन मिलेगा और निर्यात की गति बढ़ेगी। भारत सरकार द्वारा यूरोपीय संघ और कुछ विशिष्ट देशों को छोड़कर अन्य यूरोपीय बाजारों के लिए निरीक्षण प्रमाणपत्र में दी गई 6 महीने की छूट एक रणनीतिक कदम है।
इससे न केवल निर्यात प्रक्रिया की जटिलताएं और परिचालन लागत कम होगी, बल्कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय चावल की अंतरराष्ट्रीय पहुँच भी तेज होगी। यह निर्णय निर्यातकों को बड़ी राहत देते हुए बंदरगाहों पर होने वाली देरी को समाप्त करेगा और व्यापार में लचीलापन बढ़ाकर भारत के कृषि निर्यात को मजबूती प्रदान करेगा।
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