उत्तर प्रदेश में गेहूं, चना और मसूर की MSP खरीद की समयसीमा बढ़ी

केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश के रबी किसानों को एक बड़ी राहत देते हुए न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी पर गेहूं, चना और मसूर की सरकारी खरीद की अवधि को आगामी 8 जुलाई तक बढ़ाने का फैसला किया है। इस महत्वपूर्ण निर्णय की घोषणा केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लखनऊ में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान की।

आधिकारिक बयान के अनुसार, वर्ष 2026-27 के रबी विपणन सीजन के लिए सरकारी खरीद की अंतिम तिथि को पहले तय की गई तारीख 24 जून से बढ़ाकर अब 8 जुलाई कर दिया गया है। सरकार के इस कदम से राज्य के लाखों किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। इस नीतिगत निर्णय का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रतिकूल मौसम, तौल में होने वाली अप्रत्याशित देरी, या खरीद केंद्रों और मंडियों में भारी भीड़ के कारण राज्य का कोई भी किसान अपनी उपज को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बेचने से वंचित न रह जाए।

समीक्षा बैठक के दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भारतीय कृषि में उत्तर प्रदेश के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत के कुल गेहूं उत्पादन में अकेले उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी लगभग 38 प्रतिशत है। ऐसे में देश की खाद्य सुरक्षा को अक्षुण्ण बनाए रखने में इस राज्य की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।

कृषि मंत्री ने उम्मीद जताई कि खरीद अवधि बढ़ने से किसानों को गेहूं, चना और मसूर की अपनी उपज को एमएसपी दरों पर बेचने के लिए पर्याप्त अतिरिक्त समय मिल जाएगा। इसके साथ ही, समय-सीमा बढ़ने से पूरे उत्तर प्रदेश में खरीद प्रक्रिया अधिक सुचारु और पारदर्शी ढंग से संचालित हो सकेगी, जिससे किसानों को मंडियों में अपनी फसल बेचने में काफी सहूलियत होगी।

निष्कर्ष: केंद्र सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश में गेहूं, चना और मसूर की सरकारी खरीद की समयसीमा को 24 जून से बढ़ाकर 8 जुलाई करना रबी किसानों के हित में एक सराहनीय और राहतकारी कदम है।

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की बैठक में लिया गया यह निर्णय न केवल प्रतिकूल मौसम और मंडियों की भीड़ जैसी व्यावहारिक चुनौतियों से जूझ रहे किसानों को अपनी उपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पाने का अतिरिक्त अवसर देगा, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा में 38 प्रतिशत गेहूं उत्पादन का योगदान देने वाले उत्तर प्रदेश की कृषि व्यवस्था को अधिक सुचारु, पारदर्शी और सशक्त भी बनाएगा।

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