मध्यप्रदेश में गेहूं उपार्जन को लेकर सरकार ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि किसानों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तथा सुचारु रूप से संचालित हो। उपार्जन केंद्रों पर किसानों के लिए बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना अब प्राथमिकता बना दी गई है।
ताकि किसान बिना किसी परेशानी के अपनी उपज बेच सकें और उन्हें समय पर भुगतान मिल सके। समीक्षा बैठक में सभी कलेक्टर्स को निर्देश दिए गए हैं कि उपार्जन केंद्रों पर छाया, शीतल पेयजल, तौल कांटे और हम्मालों की पर्याप्त व्यवस्था हर हाल में सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही रोजाना उपार्जन की समीक्षा करने को कहा गया है।
ताकि किसी भी प्रकार की समस्या या अव्यवस्था को तुरंत ठीक किया जा सके। यह कदम किसानों की सुविधा और व्यवस्था की निगरानी दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। किसानों को राहत देते हुए स्लॉट बुकिंग की अवधि को बढ़ाकर 9 मई तक कर दिया गया है। अब सभी किसानों के लिए स्लॉट बुकिंग की सुविधा भी शुरू कर दी गई है।
जिससे अधिक से अधिक किसान समय पर अपना पंजीकरण कर सकें। इसके साथ ही उपार्जन केंद्रों की क्षमता में भी बड़ा इजाफा किया गया है, जिसे 1000 क्विंटल प्रतिदिन से बढ़ाकर 2250 क्विंटल प्रतिदिन कर दिया गया है। इससे खरीदी की प्रक्रिया तेज होगी और किसानों को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि मंडियों में किसानों का किसी भी स्तर पर शोषण नहीं होना चाहिए। कलेक्टर्स को व्यक्तिगत रूप से इसकी निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि बिचौलियों या अन्य कारणों से किसानों को नुकसान न उठाना पड़े। पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना इस पूरी व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य है।
असमय वर्षा को ध्यान में रखते हुए चना और मसूर की खरीदी के लिए भी विशेष निर्देश दिए गए हैं। इन फसलों की खरीदी केवल शेड के नीचे ही की जाएगी, ताकि नमी या बारिश के कारण अनाज की गुणवत्ता प्रभावित न हो और किसानों को नुकसान से बचाया जा सके। इसके अलावा केंद्र सरकार द्वारा गुणवत्ता मानकों में भी राहत दी गई है।
चमक विहीन गेहूं की सीमा को 50% तक शिथिल किया गया है, वहीं सूकड़े दानों की सीमा 6% से बढ़ाकर 10% कर दी गई है और क्षतिग्रस्त दानों की सीमा में भी 6% तक की बढ़ोतरी की गई है। इन बदलावों से किसानों को अपनी उपज बेचने में आसानी होगी, खासकर उन क्षेत्रों में जहां मौसम के कारण गुणवत्ता प्रभावित हुई है।
कुल मिलाकर सरकार का उद्देश्य यह है कि गेहूं उपार्जन की प्रक्रिया किसानों के लिए सरल, तेज और पारदर्शी बने। यदि इन निर्देशों का सही तरीके से पालन किया जाता है, तो किसानों को न केवल सुविधा मिलेगी बल्कि उन्हें अपनी फसल का उचित मूल्य भी समय पर प्राप्त होगा।
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