एमपी में गेहूं खरीद धीमी, किसान मजबूरी में कम दाम पर बेच रहे फसल

मध्य प्रदेश में इस साल गेहूं की सरकारी खरीद प्रक्रिया किसानों के लिए बड़ी परीक्षा साबित हो रही है। रिकॉर्ड पंजीकरण के बावजूद, खरीद केंद्रों की सुस्त रफ्तार ने अन्नदाताओं की चिंता बढ़ा दी है। प्रदेश में इस सीजन में लगभग 19.04 लाख किसानों ने गेहूं बेचने के लिए पंजीकरण कराया था।

लेकिन आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, अब तक केवल 11 लाख किसान ही अपनी उपज सरकारी केंद्रों पर बेच पाए हैं। राज्य सरकार ने इस साल 100 लाख टन गेहूं खरीद का लक्ष्य रखा था, जिसमें से अब तक लगभग 85 लाख टन की ही खरीद हो सकी है। धीमी प्रक्रिया के कारण किसान संगठन इसे हाल के वर्षों का सबसे कठिन सीजन बता रहे हैं।

खरीद केंद्रों पर लॉजिस्टिक और संचालन संबंधी खामियां साफ दिख रही हैं। मजदूरों की कमी, अपर्याप्त भंडारण और तौल मशीनों की सीमित संख्या के कारण केंद्रों पर भारी भीड़ जमा हो गई है। गेहूं का समर्थन मूल्य 2,625 रुपए प्रति क्विंटल तय है, लेकिन तत्काल नकदी की जरूरत और बेमौसम बारिश के डर से किसान घबराए हुए हैं।

कई किसान मजबूरन खुले बाजार में 2,400 के भाव पर अपनी फसल बेच रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि एमएसपी की तुलना में 15% कम दाम पर फसल बेचना किसानों के लिए बड़ा आर्थिक नुकसान है। यदि प्रशासन ने खरीद में तेजी नहीं लाई, तो सरकारी लक्ष्य हासिल करना नामुमकिन हो सकता है।

निष्कर्ष: मध्य प्रदेश में रिकॉर्ड किसान पंजीकरण के बावजूद सरकारी खरीद केंद्रों की सुस्त रफ्तार, मजदूरों की कमी और खराब प्रबंधन के कारण गेहूं की खरीद प्रक्रिया बेहद धीमी चल रही है।

नतीजतन, बेमौसम बारिश के डर और पैसों की तत्काल जरूरत के चलते राज्य के लाखों किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य (2,625 रुपये प्रति क्विंटल) से लगभग 15% कम दाम (2,400 रुपये प्रति क्विंटल) पर अपनी फसल खुले बाजार में बेचने को मजबूर हैं।

यदि प्रशासन ने लॉजिस्टिक्स की इन कमियों को दूर कर खरीद में तेजी नहीं लाई, तो न केवल सरकार का 100 लाख टन गेहूं खरीद का लक्ष्य अधूरा रह जाएगा, बल्कि अन्नदाताओं को भी भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।

यह भी पढ़े: सरकार ने दलहन-तिलहन फसलों के लिए 135 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी

जागरूक रहिए व नुकसान से बचिए और अन्य लोगों के जागरूकता के लिए साझा करें। कृषि लेख, सरकारी योजनाएं, कृषि तकनीक, व्यवसायिक एवं जैविक खेती से संबंधित सटीक जानकारियां प्राप्त करने के लिए जुड़े कृषि जागृति चलो गांव की ओर से या कृषि संबंधित किसी भी समस्या के जैविक समाधान के लिए WhatsApp करें।