अब गन्ना नहीं, गुड़ बेचकर मुनाफा कमाएंगे मध्य प्रदेश के गन्ना किसान, जाने कैसे

मध्य प्रदेश सरकार ने गन्ना उत्पादक क्षेत्रों की तस्वीर बदलने के लिए एक शानदार पहल की है। अब राज्य के किसान केवल गन्ना बेचने तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि खुद गुड़ बनाकर उसे बाजार में बेचेंगे। इस नई रणनीति को ‘किसान कल्याण वर्ष 2026’ का मुख्य हिस्सा बनाया गया है ताकि किसानों को उनकी फसल का बेहतर दाम मिल सके।

यह पूरी योजना सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विभाग द्वारा संचालित की जा रही है। सरकार का मुख्य जोर इस बात पर है कि प्रोसेसिंग की इकाइयां गांव के पास ही हों, ताकि किसानों को कच्चा माल दूर न ले जाना पड़े। इसे ‘सूक्ष्म और लघु उद्यम क्लस्टर विकास योजना’ के तहत अमली जामा पहनाया जा रहा है।

राज्य सरकार ने इस काम के लिए दतिया, नरसिंहपुर, मंडला और बालाघाट जैसे प्रमुख जिलों को गुड़ उत्पादन क्लस्टर के रूप में चुना है। विशेष रूप से बालाघाट के कटंगी, खैरलांजी और वारासिवनी जैसे क्षेत्रों में बड़े स्तर पर काम शुरू किया जा रहा है। इन जिलों में गुड़ उत्पादन को एक संगठित उद्योग का रूप देने की तैयारी है।

इस मुहिम को मजबूती देने के लिए भोपाल के विंध्याचल भवन में विशेष प्रशिक्षण शिविर भी आयोजित किए जा रहे हैं। इसमें किसान उत्पादक संगठनों और स्वयं सहायता समूहों को गुड़ बनाने की आधुनिक तकनीक सिखाई जा रही है। प्रशिक्षण में केवल गुड़ बनाना ही नहीं, बल्कि उसकी अच्छी पैकेजिंग और मार्केटिंग करना भी शामिल है।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि जब किसान कच्चे गन्ने के बजाय गुड़ जैसे उच्च मूल्य वाले उत्पाद तैयार करेगा, तो उसकी आय में स्थिरता आएगी। उप संचालक फूलसिंह मालवीय के अनुसार, स्थानीय स्तर पर प्रोसेसिंग यूनिट लगने से गांव के युवाओं को रोजगार भी मिलेगा। इससे ग्रामीण इलाकों में छोटे-छोटे कृषि उद्योग विकसित होंगे।

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